रोजगार, शिक्षा, सामाजिक स्वतंत्रता और डिजिटल अधिकारों जैसे मुद्दों पर मुखर जेन-जी आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाली सबसे प्रभावशाली मतदाता शक्ति बन सकती है। वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव तक इस पीढ़ी के मतदाताओं की संख्या करीब 38 करोड़ होने का अनुमान है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए युवाओं की आकांक्षाओं को चुनावी घोषणापत्र और नीतियों में स्थान देना जरूरी होगा।
भारत जनसंख्या अनुमान-2026 के विश्लेषण के अनुसार, देश के लगभग हर तीन मतदाताओं में से एक जेन-जी से संबंधित होगा। वर्ष 2026 में 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी करीब 29.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। तुलना में नाइजीरिया में यह अनुपात 41.4 प्रतिशत, पाकिस्तान में 37.8 प्रतिशत और बांग्लादेश में 32.3 प्रतिशत बताया गया है।
वर्ष 2029 तक 18 से 32 वर्ष आयु वर्ग की जेन-जी आबादी लगभग 38 करोड़ हो सकती है। इसमें पुरुषों की संख्या करीब 19.9 करोड़ और महिलाओं की 18.1 करोड़ रहने का अनुमान है। यह संख्या संयुक्त रूप से कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक है।
राज्यवार तस्वीर देखें तो युवा मतदाताओं की सर्वाधिक हिस्सेदारी बिहार में 36.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 33.9, झारखंड में 33.8, राजस्थान में 32.3 और मध्य प्रदेश में 31.4 प्रतिशत युवा मतदाता होंगे। केरल में यह अनुपात सबसे कम 22.2 प्रतिशत रहने की संभावना है।
हालांकि, 18 से 29 वर्ष के मतदाताओं की हिस्सेदारी समय के साथ घट रही है। वर्ष 1988 में इस आयु वर्ग का हिस्सा 38.3 प्रतिशत था, जो 2024 में करीब 30.1 प्रतिशत रह गया। वर्ष 2029 तक इसके 27.8 प्रतिशत होने का अनुमान है। इसके बावजूद संख्या के लिहाज से जेन-जी सबसे बड़ा और निर्णायक चुनावी समूह बनी रहेगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह पीढ़ी केवल पारंपरिक नारों से प्रभावित नहीं होगी। रोजगार, कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शिता, पर्यावरण और डिजिटल अवसर जैसे मुद्दे उसके मतदान व्यवहार को तय करेंगे। इसलिए आगामी चुनावों में सत्ता का रास्ता काफी हद तक युवा मतदाताओं के विश्वास से होकर गुजरेगा।


