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डेटिंग ऐप से ऊबी युवा पीढ़ी, ऑफलाइन रिश्तों की ओर बढ़ा रुझान

युवाओं के बीच कभी तेजी से लोकप्रिय हुए डेटिंग ऐप अब अपना आकर्षण खोते दिखाई दे रहे हैं।

Dating App Fatigue Pushes Gen Z Towards Real-World Connections


Published: 16:30pm, 05 Aug 2026

युवाओं के बीच कभी तेजी से लोकप्रिय हुए डेटिंग ऐप अब अपना आकर्षण खोते दिखाई दे रहे हैं। फर्जी प्रोफाइल, बेजान बातचीत, लगातार स्वाइप करने की थकान और डिजिटल दुनिया में रिश्तों की अनिश्चितता के कारण बड़ी संख्या में युवा इन प्लेटफॉर्म से दूरी बना रहे हैं।

फोर्ब्स द्वारा पांच हजार से अधिक युवाओं पर किए गए सर्वेक्षण में सामने आया कि 80 प्रतिशत मिलेनियल और 79 प्रतिशत जेन-जी उपयोगकर्ता डेटिंग ऐप से ऊब चुके हैं। ब्रिटेन की मीडिया नियामक एजेंसी ऑफकॉम की रिपोर्ट भी इस बदलाव की पुष्टि करती है। लोकप्रिय डेटिंग प्लेटफॉर्म के सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या में गिरावट दर्ज होने की बात कही गई है।

विशेषज्ञ इस स्थिति को ‘डेटिंग ऐप बर्नआउट’ या ‘डिजिटल थकान’ बता रहे हैं। उनका मानना है कि इन ऐप ने रिश्तों की तलाश को विकल्पों और स्वाइप के खेल में बदल दिया है। इससे लोगों के बीच वास्तविक संवाद, भरोसा और भावनात्मक जुड़ाव कमजोर हुआ है।

भारत में डेटिंग ऐप का इस्तेमाल विशेष रूप से महानगरों और टियर-1 शहरों में बढ़ा है। अनुमान के अनुसार करीब 40 प्रतिशत शहरी युवा नए लोगों से मिलने, दोस्त बनाने या साथी खोजने के लिए इनका उपयोग करते हैं। इसके बावजूद जेन-जी और मिलेनियल अब प्राकृतिक और भरोसेमंद मुलाकातों को प्राथमिकता देने लगे हैं।

युवा डांस एवं सोशल क्लब, सामुदायिक आयोजन, हॉबी कक्षाएं, कार्यशालाएं और समूह गतिविधियों के माध्यम से नए लोगों से जुड़ रहे हैं। दोस्तों तथा साझा रुचियों के जरिए होने वाला परिचय भी अधिक विश्वसनीय माना जा रहा है। यह बदलाव डिजिटल संपर्क से वास्तविक सामाजिक रिश्तों की ओर लौटने का संकेत है।

Jitendra