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भारत में जीआई उत्पादों की संख्या 800 के पार

भारत में भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संख्या 800 से अधिक हो गई है। वर्ष 2014 से अब तक 607 उत्पादों को जीआई टैग प्रदान किया गया है।

India Surpasses 800 GI-Tagged Products, Boosting Local Exports and Artisans


Published: 12:43pm, 05 Aug 2026

भारत में भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संख्या 800 से अधिक हो गई है। वर्ष 2014 से अब तक 607 उत्पादों को जीआई टैग प्रदान किया गया है। पंजीकरण के मामले में उत्तर प्रदेश 81 उत्पादों के साथ देश में पहले स्थान पर है, जबकि तमिलनाडु 76 पंजीकरण के साथ दूसरे स्थान पर है।

राज्यवार आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में 55, कर्नाटक में 49, असम में 42, केरल में 41 और पश्चिम बंगाल में 36 जीआई उत्पाद पंजीकृत हैं। गुजरात तथा मध्य प्रदेश में 30-30 और उत्तराखंड में 29 उत्पादों को जीआई पहचान मिली है।

दिसंबर 2025 तक देश में 445 हस्तशिल्प उत्पाद और 27 उत्पाद लोगो पंजीकृत किए गए। इनमें जम्मू-कश्मीर की पश्मीना, पश्चिम बंगाल की बालूचरी साड़ी और उत्तर प्रदेश की बनारस गुलाबी मीनाकारी शामिल हैं।

कृषि श्रेणी में 251 उत्पादों का पंजीकरण हुआ है। इनमें अनाज, फल, सब्जियां, मसाले और गैर-बासमती चावल शामिल हैं। नासिक वैली वाइन और कन्नौज परफ्यूम सहित 64 विनिर्माण उत्पाद भी जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं।

खाद्य श्रेणी में 66 उत्पाद पंजीकृत हैं। इनमें पश्चिम बंगाल का बर्धमान मिहिदाना और सीताभोग, ओडिशा का केंद्रपाड़ा रसाबली तथा आंध्र प्रदेश का तिरुपति लड्डू प्रमुख हैं।

प्राकृतिक उत्पादों में राजस्थान का मकराना मार्बल, उत्तर प्रदेश का चुनार बलुआ पत्थर, पश्चिम बंगाल के पुरुलिया का लाख उत्पाद, मध्य प्रदेश का पन्ना हीरा और गुजरात का अंबाजी सफेद संगमरमर शामिल हैं।

दार्जिलिंग चाय भारत में जीआई टैग पाने वाला पहला उत्पाद था। इसके बाद अरनमुला कन्नडी और पोचमपल्ली इकत जैसे पारंपरिक उत्पादों को यह पहचान मिली। पिछले दस वर्षों में अधिकृत जीआई उपयोगकर्ताओं की संख्या 365 से बढ़कर जनवरी 2025 तक लगभग 29 हजार हो गई है।

जीआई टैग से स्थानीय उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिल रहा है। मुजफ्फरनगर गुड़ को जीआई पहचान मिलने के बाद एक एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ने वर्ष 2025 में बांग्लादेश को 30 मीट्रिक टन गुड़ निर्यात किया। इससे कंपनी के 545 किसान सदस्यों के लिए आय और नए बाजारों की संभावनाएं बढ़ी हैं।

Jitendra