Trending News

तमिलनाडु: TVK सरकार के पहले बजट में महिलाओं की गोल्ड कॉइन-सिल्क साड़ी योजना के लिए ₹812 करोड़ महाराष्ट्र के स्कूलों में नशामुक्ति का पाठ पढ़ाया जाएगा, CM फडणवीस ने दिए निर्देश E20 विवाद में नितिन गडकरी को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत, Deepfake और AI तस्वीरें हटाने के आदेश जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल पूरे, एक तरफ जश्न तो दूसरी तरफ काले दिन का एलान और हाई अलर्ट उत्तराखंड टीईटी के लिए बढ़ी आवेदन की लास्ट डेट, अब 9 अगस्त तक भरें फॉर्म जनगणना 2027 का शेड्यूल जारी, पहाड़ी इलाकों में 1 सितंबर से गणना, 17 अगस्त से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू तमिलनाडु: TVK सरकार के पहले बजट में महिलाओं की गोल्ड कॉइन-सिल्क साड़ी योजना के लिए ₹812 करोड़ महाराष्ट्र के स्कूलों में नशामुक्ति का पाठ पढ़ाया जाएगा, CM फडणवीस ने दिए निर्देश E20 विवाद में नितिन गडकरी को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत, Deepfake और AI तस्वीरें हटाने के आदेश जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल पूरे, एक तरफ जश्न तो दूसरी तरफ काले दिन का एलान और हाई अलर्ट उत्तराखंड टीईटी के लिए बढ़ी आवेदन की लास्ट डेट, अब 9 अगस्त तक भरें फॉर्म जनगणना 2027 का शेड्यूल जारी, पहाड़ी इलाकों में 1 सितंबर से गणना, 17 अगस्त से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू

डीप-टेक स्टार्टअप्स को पायलट नहीं, वास्तविक कारोबारी साझेदारी की जरूरत

भारत की लगभग हर बड़ी कंपनी के पास इनोवेशन का लक्ष्य और बजट है, कंपनियां इनोवेशन समिट आयोजित करती हैं, एमओयू करती हैं और एक्सेलरेटर प्रोग्राम चलाती हैं

Deep-Tech Startups Need Business Partnerships, Not Just Pilot Programmes


Published: 13:24pm, 04 Aug 2026

भारत की लगभग हर बड़ी कंपनी के पास इनोवेशन का लक्ष्य और बजट है। कंपनियां इनोवेशन समिट आयोजित करती हैं, एमओयू करती हैं और एक्सेलरेटर प्रोग्राम चलाती हैं। इसके बावजूद बहुत कम प्रयास वास्तविक कारोबारी परिणामों तक पहुंच पाते हैं। इसका कारण इरादे की नहीं, बल्कि आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर और कॉरपोरेट प्रतिबद्धता की कमी है।

भारत में करीब 4,000 डीप-टेक स्टार्टअप हैं। वर्ष 2024 में इस क्षेत्र को लगभग 1.6 अरब डॉलर का निवेश मिला, जो पिछले वर्ष से 78 प्रतिशत अधिक है। सरकार का अनुमान है कि 2030 तक इनकी संख्या 10,000 हो सकती है और ये अर्थव्यवस्था में 350 अरब डॉलर का योगदान दे सकते हैं। लेकिन स्टार्टअप्स के विस्तार में सबसे बड़ी बाधा तकनीक नहीं, बल्कि ऐसे विश्वसनीय कॉरपोरेट ग्राहकों की कमी है, जो शुरुआती तकनीक को वास्तविक कारोबारी वातावरण में आजमाने के लिए तैयार हों।

किसी स्टार्टअप को टाटा, महिंद्रा या लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनी से पायलट प्रोजेक्ट मिलने पर निवेशकों का भरोसा बढ़ जाता है। इसलिए कॉरपोरेट इंडिया डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए बड़े निवेश का रास्ता खोल सकता है।

भारत जीडीपी का लगभग 0.67 प्रतिशत आरएंडडी पर खर्च करता है, जबकि चीन 2.55 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया 4.93 प्रतिशत खर्च करते हैं। विकसित देशों में कुल आरएंडडी निवेश में निजी उद्योग की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है, जबकि भारत में यह केवल 36 प्रतिशत है। भविष्य की तकनीकों का पूरा वित्तीय भार सरकार पर नहीं छोड़ा जा सकता।

प्रभावी कॉरपोरेट इनोवेशन के लिए स्टार्टअप्स को केवल पिचिंग और डेमो-डे तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। संबंधित बिजनेस यूनिट के वरिष्ठ अधिकारी को पायलट प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी लेनी होगी और आवश्यक इंजीनियरिंग संसाधन उपलब्ध कराने होंगे।

भारत की 2030 की डीप-टेक महत्वाकांक्षा सरकारी नीतियों और वेंचर कैपिटल से ही पूरी नहीं होगी। कंपनियों को स्टार्टअप्स को वास्तविक कारोबारी साझेदार मानना होगा। देश को ऐसी कॉरपोरेट संस्कृति चाहिए जो नई तकनीक से कहे—“हां, हम इसे मौका देंगे।”

Jitendra