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सस्ता इलाज, तेज सेवाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों से भारत बना मेडिकल टूरिज्म का नया केंद्र

भारत अब केवल कम खर्च में इलाज उपलब्ध कराने वाला देश नहीं रहा, बल्कि तेजी से वैश्विक मेडिकल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बन रहा है

Low-Cost Treatment and Faster Care Drive Foreign Patients to India


Published: 11:53am, 27 Jul 2026

भारत अब केवल कम खर्च में इलाज उपलब्ध कराने वाला देश नहीं रहा, बल्कि तेजी से वैश्विक मेडिकल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बन रहा है। वर्ष 2009 में करीब 1.12 लाख विदेशी मरीज इलाज के लिए भारत आए थे। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 5.07 लाख हो गई। इस तरह 16 वर्षों में भारत आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या लगभग साढ़े चार गुना बढ़ी है।

भारत में इलाज कराने वाले मरीजों में बांग्लादेश, इराक, उज्बेकिस्तान, सोमालिया, ओमान और केन्या के नागरिकों की संख्या प्रमुख है। वर्ष 2025 में देश का मेडिकल टूरिज्म बाजार करीब 84 हजार करोड़ रुपए का रहा। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक इसका आकार बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

भारत की सबसे बड़ी ताकत इलाज की अपेक्षाकृत कम लागत है। अमेरिका में हार्ट बाईपास सर्जरी पर लगभग 77.3 लाख रुपए खर्च होते हैं, जबकि भारत में यही सर्जरी करीब 6.76 लाख रुपए में हो सकती है। इससे लगभग 91 प्रतिशत तक बचत होती है। इसी तरह हिप रिप्लेसमेंट की लागत भारत में 7.7 लाख रुपए और अमेरिका में 38.6 लाख रुपए है। एक डेंटल इम्प्लांट भारत में करीब 48 हजार रुपए में हो जाता है, जबकि अमेरिका में इसकी लागत लगभग 5.8 लाख रुपए तक पहुंचती है। आईवीएफ प्रक्रिया में भी भारत में करीब 87 प्रतिशत तक कम खर्च आता है।

कम लागत के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, जल्दी अपॉइंटमेंट, जांच रिपोर्ट समय पर मिलना और इलाज का खर्च पहले से स्पष्ट होना विदेशी मरीजों का भरोसा बढ़ा रहा है। कई देशों में विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है, जबकि भारत में मरीजों को एक-दो दिन में परामर्श और जांच की सुविधा मिल जाती है।

भारत के पास मजबूत स्वास्थ्य ढांचा भी मौजूद है। देश में 69,364 अस्पताल हैं, जिनमें 43,486 निजी और 25,778 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। करीब 12 लाख पंजीकृत डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि 1,299 अस्पतालों को एनएबीएच की मान्यता प्राप्त है।

विदेशी मरीजों की यात्रा आसान बनाने के लिए भारत 172 देशों के नागरिकों को ई-मेडिकल वीजा दे रहा है। मरीज के सहायक के लिए ई-मेडिकल अटेंडेंट वीजा और आयुष चिकित्सा के लिए ई-आयुष वीजा की सुविधा भी उपलब्ध है। ‘हील इन इंडिया’ पोर्टल को साझा डिजिटल मंच के रूप में विकसित करने की तैयारी भारत की मेडिकल टूरिज्म क्षमता को और मजबूत कर सकती है।

Jitendra