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देश में एमबीबीएस सीटें बढ़कर 1.29 लाख हुईं, पीजी मेडिकल सीटों में लगभग तीन गुना वृद्धि

देश में चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। शैक्षणिक वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,09,115 से बढ़कर 1,28,976 हो गई है। इस अवधि में कुल 19,861 नई एमबीबीएस सीटें जुड़ी हैं, जो लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती हैं। यह जानकारी लोकसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में साझा की गई।

India’s Doctor-Population Ratio Improves to 1:778


Published: 11:00am, 25 Jul 2026

देश में चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। शैक्षणिक वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,09,115 से बढ़कर 1,28,976 हो गई है। इस अवधि में कुल 19,861 नई एमबीबीएस सीटें जुड़ी हैं, जो लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती हैं। यह जानकारी लोकसभा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में साझा की गई।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अनुसार, स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में इससे भी अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। पीजी मेडिकल सीटों की संख्या शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में 31,185 थी, जो 2025-26 में बढ़कर 86,360 हो गई। इस प्रकार दो शैक्षणिक वर्षों के दौरान 55,175 अतिरिक्त पीजी सीटें उपलब्ध हुई हैं। यह संख्या 2023-24 के मुकाबले लगभग 177 प्रतिशत अधिक है और पीजी सीटों की उपलब्धता करीब तीन गुना हो गई है।

मेडिकल सीटों में हुई इस बढ़ोतरी से अधिक विद्यार्थियों को देश में ही चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। एमबीबीएस सीटों के विस्तार से नए डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलने की संभावना है, जबकि पीजी सीटों में वृद्धि से विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता को मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त होगा। पीजी मेडिकल शिक्षा के माध्यम से मेडिसिन, सर्जरी, बाल रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी तथा अन्य विशेष क्षेत्रों के डॉक्टर तैयार किए जाते हैं।

सरकार ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि इंडियन मेडिकल रजिस्टर में फिलहाल 15,35,155 एलोपैथिक चिकित्सक पंजीकृत हैं। इसके अलावा आयुष चिकित्सा प्रणाली के अंतर्गत 7,51,768 चिकित्सक पंजीकृत हैं। दोनों चिकित्सा प्रणालियों को मिलाकर देश में पंजीकृत चिकित्सा पेशेवरों की कुल संख्या 22,86,923 से अधिक हो गई है।

सरकार ने चिकित्सक-जनसंख्या अनुपात का अनुमान लगाते समय यह माना है कि एलोपैथिक और आयुष चिकित्सा प्रणालियों में पंजीकृत कुल चिकित्सकों में से लगभग 80 प्रतिशत सक्रिय रूप से उपलब्ध हैं। इस आधार पर देश में डॉक्टर और जनसंख्या का अनुमानित अनुपात सुधरकर एक डॉक्टर पर 778 लोगों का हो गया है।

हालांकि यह अनुपात पंजीकृत चिकित्सकों की कुल संख्या और उनकी अनुमानित उपलब्धता पर आधारित है। देश के विभिन्न राज्यों, ग्रामीण क्षेत्रों, आदिवासी इलाकों और महानगरों में डॉक्टरों की वास्तविक उपलब्धता अलग-अलग हो सकती है। इसलिए मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ चिकित्सकों की क्षेत्रवार तैनाती, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण रहेगा।

एमबीबीएस और पीजी सीटों में वृद्धि चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अधिक डॉक्टर और विशेषज्ञ तैयार करने, चिकित्सा संस्थानों की क्षमता बढ़ाने तथा बढ़ती आबादी की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल सकती है।

Jitendra

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