केंद्र सरकार ने देश में स्वास्थ्य अनुसंधान को मजबूत करने के लिए बजटीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) का बजट वित्त वर्ष 2014-15 के संशोधित अनुमान में ₹932 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में बढ़कर ₹4,821.21 करोड़ हो गया है। इस तरह बीते 12 वर्षों में विभाग का बजट पांच गुना से अधिक बढ़ा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी।
वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में डीएचआर के लिए ₹3,900.69 करोड़ का प्रावधान किया गया था। इसकी तुलना में 2026-27 में बजटीय आवंटन लगभग 24 प्रतिशत बढ़ाया गया है। सरकार के अनुसार, यह वृद्धि देश में चिकित्सा अनुसंधान, नई स्वास्थ्य तकनीकों और वैज्ञानिक नवाचारों को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वर्तमान में डीएचआर का आवंटन सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.012 प्रतिशत है।
सरकार ने स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए वित्तीय सहायता को अधिक प्रतिस्पर्धी और सुलभ बनाने के उद्देश्य से कई नए कार्यक्रम शुरू किए हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने अपने आंतरिक और बाहरी अनुसंधान अनुदानों की व्यवस्था का विस्तार किया है। अब शोध प्रस्तावों को उनके आकार, जोखिम, वैज्ञानिक परिपक्वता और व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं के आधार पर वित्तीय सहायता दी जा रही है।
आईसीएमआर की मौजूदा अनुदान प्रणाली के तहत छोटे या ‘अन्वेषण’ अनुदान में ₹2 करोड़ तक की सहायता दी जाती है। ‘निश्चायक अन्वेषण’ अनुदान के अंतर्गत ₹2 करोड़ से ₹8 करोड़ तक की राशि उपलब्ध कराई जाती है। ‘फर्स्ट-इन-द-वर्ल्ड चैलेंज’ के तहत चरणबद्ध तरीके से ₹8 करोड़ तक और उन्नत अनुसंधान केंद्रों को ₹15 करोड़ तक की सहायता प्रदान की जाती है।


