उत्तर प्रदेश के करीब 1.86 लाख शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET से छूट मिलने की उम्मीद को बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि TET की अनिवार्यता सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ी है, इसलिए पुराने शिक्षकों को भी फिलहाल कोई राहत नहीं दी जा सकती।
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 के फैसले में TET को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 23 के तहत न्यूनतम अनिवार्य योग्यता माना है। इसके अनुसार, RTE के दायरे में आने वाले विद्यालयों में शिक्षक पद पर बने रहने के लिए TET उत्तीर्ण करना जरूरी है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई 2026 को शिक्षकों को राहत देते हुए TET पास करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। इससे शिक्षकों को योग्यता पूरी करने के लिए एक अतिरिक्त वर्ष मिल गया है। अदालत ने राज्यों को हर वर्ष कम से कम दो बार, लगभग छह महीने के अंतराल पर TET आयोजित करने का प्रयास करने को भी कहा है।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए विशेष TET आयोजित करने की तैयारी कर रही है। शासन ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से परीक्षा की विस्तृत कार्ययोजना मांगी है।
प्रदेश में सहायक अध्यापक, शिक्षामित्र से समायोजित शिक्षक और TET व्यवस्था लागू होने से पहले नियुक्त कई शिक्षक अब तक परीक्षा पास नहीं कर सके हैं। शिक्षक संगठनों की मांग थी कि पुराने और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षकों को अनुभव के आधार पर छूट दी जाए, लेकिन केंद्र ने RTE कानून में संशोधन से इनकार कर दिया है।
निर्धारित समय सीमा तक TET पास नहीं करने वाले शिक्षकों की सेवा और पदोन्नति प्रभावित हो सकती है। इसलिए अब नियमित और विशेष TET परीक्षाओं का आयोजन शिक्षकों के भविष्य के लिए निर्णायक माना जा रहा है।


