भारतीय आईटी उद्योग अब केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का उपयोग करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंटिक एआई (Agentic AI) के जरिए तकनीकी बदलाव का नेतृत्व कर रहा है। प्रौद्योगिकी परामर्श कंपनी थॉटवर्क्स की नई रिपोर्ट के अनुसार, एजेंटिक एआई को अपनाने के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे है। रिपोर्ट बताती है कि भारतीय कंपनियां एआई को केवल कार्यों को आसान बनाने वाले उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि बिजनेस ग्रोथ और नवाचार का प्रमुख आधार मान रही हैं।
सात देशों के 3,500 अधिकारियों पर किए गए सर्वेक्षण में भारत के 500 प्रतिभागी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक 48 प्रतिशत भारतीय कंपनियां एजेंटिक एआई का उपयोग कर रही हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 28 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया में 23 प्रतिशत है। सर्वे में शामिल 86 प्रतिशत भारतीय आईटी कंपनियों का कहना है कि एआई कर्मचारियों की प्रतिभा और उत्पादकता को बढ़ा रहा है, न कि नौकरियां छीन रहा है। वहीं 57 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि मानव और एआई के बेहतर सहयोग से नई भूमिकाओं और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 49 प्रतिशत भारतीय उद्योग जगत के लीडर्स को भरोसा है कि अगले पांच वर्षों में उनकी आय 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ेगी, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। वहीं अगले 12 महीनों में 15 प्रतिशत से अधिक राजस्व वृद्धि की उम्मीद रखने वाले भारतीय लीडर्स की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत केवल 8 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एजेंटिक एआई पारंपरिक एआई से अधिक उन्नत तकनीक है। सामान्य एआई केवल जानकारी या सुझाव देता है, जबकि एजेंटिक एआई डिजिटल एजेंट की तरह स्वयं निर्णय लेकर कार्यों को पूरा कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि इसे तय बजट में गोवा की फ्लाइट बुक करने का निर्देश दिया जाए, तो यह इंटरनेट पर विकल्प खोजने, कैलेंडर से तारीख मिलाने और बुकिंग पूरी करने जैसे सभी कार्य स्वयं कर सकता है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि भारत तेजी से एआई नवाचार का वैश्विक केंद्र बन रहा है और भारतीय कंपनियां भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए एजेंटिक एआई पर बड़ा दांव लगा रही हैं।


