भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने कैंसर और संक्रामक रोगों से निपटने के लिए विकसित तीन स्वदेशी जैव-चिकित्सीय तकनीकों का भारतीय दवा और वैक्सीन निर्माताओं को हस्तांतरण किया है। इनमें सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी SHetA2 एंटी-एचपीवी उपचार तकनीक और टाइफाइड, पैराटाइफाइड तथा शिगेला संक्रमण के खिलाफ दो अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीकें शामिल हैं।
SHetA2 को एचपीवी से प्रभावित पूर्व-कैंसर और कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। वहीं दोनों वैक्सीन तकनीकें आंतों से जुड़ी गंभीर जीवाणु बीमारियों के खिलाफ व्यापक सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता रखती हैं।
आईसीएमआर की ‘मेडिकल इनोवेशंस पेटेंट मित्र’ पहल के तहत किए गए इस तकनीकी हस्तांतरण का उद्देश्य सरकारी वित्तपोषित शोध को किफायती उपचार और वैक्सीन के रूप में लोगों तक पहुंचाना है। आगे इन तकनीकों का विकास, परीक्षण, निर्माण और व्यावसायीकरण उद्योग द्वारा किया जाएगा। यह कदम भारत की स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता और स्वदेशी बायोमेडिकल नवाचार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


