अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने नीट-यूजी री-एग्जाम से पहले ऑनलाइन पेपर दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने राजस्थान और बिहार से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर 21 जून को होने वाले NEET री-एग्जाम और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर उपलब्ध कराने का झांसा देकर 1000 से अधिक छात्रों और अभिभावकों से लाखों रुपये ठगने का आरोप है।
राजस्थान के सुमेर सिंह मीना और आकाश मीना टेलीग्राम चैनलों तथा फर्जी वेबसाइटों के माध्यम से पेपर दिलाने का दावा करते थे। इसके बदले छात्रों से 15 हजार से 80 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। वहीं बिहार का आरोपी नवीन यादव परीक्षा शुल्क रिफंड के नाम पर धोखाधड़ी करता था। वह छात्रों की लॉगिन जानकारी हासिल कर उनके अकाउंट का पासवर्ड बदल देता और रिफंड की राशि अपने खातों में ट्रांसफर कर लेता था। जांच में सामने आया कि उसने करीब 150 छात्रों के रिफंड के पैसे हड़प लिए।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने 44 वेबसाइट और 8 टेलीग्राम चैनल बनाए हुए थे, जहां फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट और धन्यवाद संदेश पोस्ट कर भरोसा जीतने की कोशिश की जाती थी। वे दावा करते थे कि उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए पुराने पेपरों का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा सही साबित हुआ था। इसी झांसे में आकर बड़ी संख्या में छात्रों ने पैसे भेजे, लेकिन बदले में उन्हें पुराने या फर्जी प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी ही मिली।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लेन-देन छिपाने के लिए गेमिंग वेबसाइटों के खातों का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परीक्षा का असली पेपर लीक नहीं हुआ था और आरोपी केवल पेपर लीक विवाद का फायदा उठाकर लोगों को ठग रहे थे। इस बीच NTA ने 21 जून को होने वाले NEET UG री-एग्जाम की अवधि 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट कर दी है तथा उत्तर पुस्तिका में रफ वर्क के लिए अतिरिक्त जगह भी दी गई है।


