सुपर अल नीनो के संभावित प्रभावों के बीच इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। तीन दिन की देरी से 4 जून को केरल पहुंचा मानसून अब तक अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है और पिछले एक सप्ताह से इसकी प्रगति लगभग थमी हुई है।
आमतौर पर 15 जून तक मानसून महाराष्ट्र को पार कर गुजरात और मध्य प्रदेश में प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार यह अभी भी कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के आसपास ही सीमित है। इसके कारण देश के मध्य, पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बारिश की कमी बनी हुई है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 15 जून के बीच देश में केवल 42.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो इस अवधि की सामान्य वर्षा 62.1 मिमी की तुलना में 32 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्षा में भी बड़ा योगदान उत्तर भारत में हुई प्री-मानसून बारिश का रहा है, जबकि कई क्षेत्रों में अब भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।
हालिया उपग्रह चित्रों में मानसून की सक्रियता कमजोर दिखाई दे रही है। दक्षिणी, मध्य और पूर्वी भारत के बड़े हिस्सों में बादलों की कमी देखी जा रही है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में इस समय मानसूनी बादलों का व्यापक विस्तार होता है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार से पांच दिनों के दौरान मानसून के मध्य अरब सागर के कुछ और हिस्सों, महाराष्ट्र, कर्नाटक के शेष भागों, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार तथा छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, बारिश की कमी का दायरा अगले सप्ताह तक बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में हाल के दिनों में हुई प्री-मानसून बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि 18 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिससे इन क्षेत्रों में मौसम फिर से बदल सकता है।


