राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि पशुधन क्षेत्र आज कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे सशक्त आधार बन चुका है। वे छत्तीसगढ़ स्थित दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सभी स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोधार्थियों, उनके अभिभावकों और विश्वविद्यालय के शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
डॉ. शाह ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु अनिश्चितता और सिंचाई से जुड़ी चुनौतियों के वर्तमान दौर में पशुधन किसानों को स्थायी और सुनिश्चित आय प्रदान करता है। साथ ही यह देश की लगभग 140 करोड़ आबादी की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत जैसे शाकाहारी प्रधान देश में दुग्ध आधारित प्रोटीन पशु प्रोटीन का एक उत्कृष्ट, सुलभ और किफायती स्रोत है।
उन्होंने कहा कि दुग्ध क्षेत्र से प्रतिवर्ष 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मूल्य संवर्धन होता है, जो गेहूँ और चावल के संयुक्त योगदान से भी अधिक है। डेयरी सहकारी संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए डॉ. शाह ने बताया कि इन संस्थाओं के माध्यम से किसानों को 10 दिनों के भीतर डिजिटल भुगतान सुनिश्चित किया जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिरता मजबूत होती है। भारतीय डेयरी सहकारी मॉडल को विश्व में अद्वितीय बताते हुए उन्होंने कहा कि उपभोक्ता द्वारा चुकाए गए मूल्य का 70 से 85 प्रतिशत सीधे किसानों तक पहुँचता है।
भारत की डेयरी यात्रा पर प्रकाश डालते हुए डॉ. शाह ने कहा कि एक समय देश दूध के लिए विदेशी राष्ट्रों पर निर्भर था, लेकिन आनंद से प्रारंभ हुए सहकारी मॉडल और एनडीडीबी द्वारा कार्यान्वित ‘ऑपरेशन फ्लड’ कार्यक्रम ने भारत को आत्मनिर्भर बनाया। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 1998 से भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना। आज दूध ग्रामीण समाज के सामाजिक और आर्थिक उत्थान का सशक्त माध्यम है और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
उन्होंने बताया कि देश के लगभग 6 से 6.5 लाख गाँवों में से केवल करीब 2 लाख गाँवों में ही डेयरी सहकारी संस्थाएँ मौजूद हैं। इस अंतर को पाटने के लिए सरकार द्वारा ‘व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0’ के तहत सहकारी ढाँचे के विस्तार पर कार्य किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियाँ स्थापित की जा रही हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में NDDB के सहयोग से 200–250 गाँवों में डेयरी समितियाँ प्रारंभ की गई हैं, जिससे राज्य में दूध संकलन में निरंतर वृद्धि हो रही है।
डॉ. शाह ने पशु उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रजनन, पोषण और पशु स्वास्थ्य पर केंद्रित समग्र प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्वदेशी सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक, नस्ल सुधार कार्यक्रम, संतुलित आहार प्रबंधन, राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण योजनाओं तथा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।


