सहकारिता के माध्यम से युवाओं का आर्थिक सशक्तीकरण करने के लिए दिसंबर 1999 में जब नेशनल युवा कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड (एनवाईसीएस) की स्थापना की गई थी, तब शायद ही इसके संस्थापकों ने सोचा होगा कि यह युवाओं की बड़ी कोऑपरेटिव सोसायटी में से एक बन जाएगी। नेटवर्थ के मामले में भले ही यह बड़ी न हो, लेकिन नेटवर्क के मामले में यह देशभर में फैल चुकी है। देश के 600 से ज्यादा जिलों में संगठन के प्रतिनिधि और सदस्य मौजूद हैं। यही व्यापक नेटवर्क इसके संचालन का आधार है। एनवाईसीएस के संस्थापकों में इसके संस्थापक अध्यक्ष वी. मुरलीधरन जो 2019 से 2024 तक विदेश राज्य मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री रहे, वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और सहकारिता क्षेत्र के दिग्गज सतीश मराठे जैसे लोग रहे हैं। इनके अलावा मौजूदा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद जैसे राजनीतिज्ञ भी एनवाईसीएस के दो बार डायरेक्टर रह चुके हैं। युवाओं की इस सहकारी संस्था ने 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं या यूं कहें कि यह संस्था अब जवान हो चुकी है और आगे का सफर तय करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
एनवाईसीएस की भविष्य की गतिविधियों को लेकर 22 अगस्त को हुई वार्षिक आम सभा (एजीएम) में विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में 22 राज्यों से आए संगठन के प्रतिनिधि मौजूद थे। एजीएम को संबोधित करते हुए एनवाईसीएस के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश साहू ने कहा, ‘सहकारिता के माध्यम से युवाओं का आर्थिक सशक्तीकरण करने के उद्देश्य से नेशनल युवा कोऑपरेटिव सोसायटी का गठन किया गया। उस समय जिन लोगों ने इसकी स्थापना की थी, उन्होंने पहले ही यह भांप लिया था कि आने वाले वर्षों में देश के युवाओं का भविष्य संवारने के लिए क्या जरूरी है। इस संस्था का जन्म गैर डिजिटल और गैर इंटरनेट एरा में हुआ था, जिसके बिना आज जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती। तब संस्थापकों की इसके भविष्य को लेकर क्या सोच थी यह तो पता नहीं, लेकिन वे अपने मकसद में कामयाब जरूर हुए। अपने शुरुआती दिनों में इस संस्था ने बुक लॉन्चिंग से लेकर केरल में ड्राई फिश बेचने और स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के जरिये यूथ डेवलपमेंट जैसे हर तरीके के काम किए।’ 25 वर्षों की अपनी यात्रा में एनवाईसीएस ने युवा सशक्तीकरण से जुड़े बहुत सारे काम किए हैं। इस दौरान संगठन ने हजारों लोगों को एन्टरप्रेन्योर बनने में मदद की है, युवा उद्यमियों को तैयार किया है और ऐसे युवा जिनके पास रोजगार और स्वरोजगार के लिए कोई कौशल नहीं था, उनका कौशल विकास कर उनकी जिंदगी को संवारने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने में मददगार रहा है।
आगे बढ़ने को तैयार
एनवाईसीएस प्रेसीडेंट ने एजीएम में मौजूद जिला और राज्य प्रतिनिधियों को धन्यवाद देते हुए उन्हें संगठन का बेहतर नेतृत्वकर्ता बताया। उन्होंने कहा, ‘हम भाग्यशाली हैं कि अब हम ऐसे समय में हैं जब भारत सरकार ने सहकारिता का महत्व समझते हुए अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन किया और सहकारिता के माध्यम से देश को विकसित बनाने का लक्ष्य रखा है जिसमें युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। युवाओं और गांवों का सशक्तीकरण किए बगैर विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है। शुरुआती 10 वर्षों में इस संगठन ने काफी संघर्ष किया है। आज हम जिस मुकाम पर हैं यह उन्हीं संघर्षों का नतीजा है। भविष्य को लेकर हम काफी आशावान हैं, इसलिए समय के साथ तालमेल बैठाते हुए संगठन ने खुद में बदलाव किया है और आगे बढ़ने को प्रेरित हुए हैं।’

यह वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए एनवाईसीएस नवंबर महीने में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय युवा सहकार सम्मेलन करने जा रही है। इस सम्मेलन के माध्यम से न सिर्फ भारतीय सहकारिता की गूंज दुनिया सुनेगी, बल्कि एनवाईसीएस की पहचान भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनेगी और संगठन को अगले स्तर पर ले जाने में इसकी बड़ी भूमिका होगी। यह देश के युवाओं को सहकारिता से जोड़ने का एक बेहतर माध्यम भी बनेगी। इस सम्मेलन में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के अलावा राज्यों के सहकारिता मंत्री, सहकारिता विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी सहित देशभर के युवा प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
सहकारिता क्षेत्र में अपार संभावनाएं
विश्व में भारत एक सशक्त युवा देश के रूप में उभरा है। देश की कुल जनसंख्या में युवाओं की हिस्सेदारी सर्वाधिक है। अगले दो दशक तक कमोबेश यही स्थिति बनी रहेगी। युवाओं को कुशल बनाकर उन्हें देश की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने की बड़ी चुनौती है। देश के विकास में इस युवा आबादी के सकारात्मक योगदान और अर्थव्यवस्था के साथ उसे जोड़ने की पर्याप्त संभावना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का आह्वान किया है। इस लक्ष्य को पाने के लिए देश की युवा शक्ति की ऊर्जा अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिए आवश्यक होगा कि युवाओं के लिए बेहतर संभावनाओं वाले क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध कराए जाएं। सहकारी क्षेत्र इस मामले में एक नए सेक्टर के रूप में सामने आया है।
सहकारिता एक ऐसे क्षेत्र के रूप में उभरा है जो भारत के व्यापक विकास का सपना पूर्ण कर सकता है। इसमें समाज की निचली इकाई ग्राम पंचायत से लेकर राष्ट्रीय विकास की धुरी बनते हुए विकसित भारत का आधार बनने की क्षमता है। जरूरत है, इसकी संभावनाओं की पहचान और उन्हें अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा का हिस्सा बनाने की। इसी उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए एनवाईसीएस अंतरराष्ट्रीय युवा सहकार सम्मेलन का आयोजन कर रही है। इसका मकसद युवाओं को सहकारिता क्षेत्र से जुड़ने के लिए प्रेरित करना, उन्हें जागरूक बनाकर बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए नए द्वार खोलना, तकनीक के इस्तेमाल से सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाना, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवा प्रतिभाओं को सम्मानित करने के साथ–साथ सहकारिता कैसे गांव–समाज और देश का विकास कर सकती है, इसकी संभावनाओं को तलाशना है।
एनवाईसीएस के पास बेहतर मौका
एजीएम को एनवाईसीएस की मैनेजिंग कमेटी के चेयरमैन राजेश पांडे ने भी संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘एनवाईसीएस नवंबर में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय युवा सहकार सम्मेलन करने जा रही है। इस सम्मेलन का थीम ‘युवा सहकारः विकसित भारत का आधार’ रखा गया है जिसमें 1000 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का जो सपना देखा है उसे साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने वाली है क्योंकि भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है और यह सबसे युवा देश है। अगले एक दशक तक भारत इसी तरह युवाओं का देश बना रहेगा। इन युवाओं की सहकारिता में सहभागिता के जरिये विकसित भारत का सपना पूरा होगा। विकसित भारत बनाने में एक तरफ कॉरपोरेट की और दूसरी ओर कोऑपरेटिव की भूमिका होगी। भारतीय अर्थव्यवस्था में कोऑपरेटिव की भागीदारी बढ़ाने के जो प्रयास चल रहे हैं उसमें एनवाईसीएस का क्या योगदान होगा, अंतरराष्ट्रीय युवा सहकार सम्मेलन में इस पर भी मंथन किया जाएगा। एनवाईसीएस अब 25 वर्ष का हो चुका है और अच्छी स्थिति में पहुंच गया है। पहली बार यह संस्था मुनाफे में आई है। अब हमारा समय आ गया है कि हम कुछ करके दिखाएं।’
एनवाईसीएस ने पिछले तीन-चार वर्षों में जननिधि पर फोकस किया है। करीब 60 हजार से ज्यादा लोगों को लोन के माध्यम से, रोजगार और स्वरोजगार के माध्यम से सशक्त बनाया गया है और उन्हें उनकी आजीविका के लिए तैयार किया है। हालांकि, सहकारिता क्षेत्र में जननिधि का योगदान अभी बहुत छोटा है, लेकिन हमारा लक्ष्य है कि आने वाले तीन-चार वर्षों में एनवाईसीएस का कारोबार 500 करोड़ रुपये तक पहुंचाया जाए। एनवाईसीएस का टर्नओवर 2024-25 में 150 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है। युवाओं में उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने और उनके उद्यमों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए एनवाईसीएस जननिधि नाम से एक माइक्रो फाइनेंस डिवीजन चलाता है। वर्तमान में देश भर के 5 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में जननिधि के 35 केंद्र संचालित हैं। इसके माध्यम से 40,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष लाभार्थियों को 90 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए हैं।
बड़ा सोचने और हकीकत में बदलने की ओर कदम
इसी तरह, मध्य प्रदेश में एनवाईसीएस और बैक टू विलेज (बी2वी) के सहयोग से ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने वाला प्रोग्राम चलाया जा रहा है जिसके तहत ग्रमीणों को होम स्टे बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके माध्यम से ग्रामीणों को गांव में ही स्वरोजगार के लिए मदद मुहैया कराई जाती है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से संचालित यह कार्यक्रम भले ही अभी संगठन की ओर से छोटे स्तर पर संचालित किया जा रहा है लेकिन यह काफी सफल रहा है। राज्य के चार जिलों में एनवाईसीएस और बी2वी इस कार्यक्रम को संचालित कर रही है जिसकी जिम्मेदारी बी2वी के संस्थापक और एनवाईसीएस के उपाध्यक्ष मनीष कुमार के कंधों पर है। मनीष आईआईटी ग्रेजुएट हैं। ग्रामीणों और युवाओं की उन्नति और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की उनकी सोच ही उन्हें कॉरपोरेट की जगह कोऑपरेटिव की ओर खींच लाई। मध्य प्रदेश की सफलता से उत्साहित होकर एनवाईसीएस भविष्य में इसे अन्य राज्यों में भी शुरू करने की योजना बना रहा है। राजेश पांडे ने कहा, ‘हालांकि यह बहुत धैर्य का काम है लेकिन अगर इसके माध्यम से गांव में ही लोगों को रोजगार और स्वरोजगार उपलब्ध होता है तो विकसित भारत बनाने में इसका भी बड़ा योगदान होगा। अब हम उस स्थिति में आ गए हैं कि नए-नए क्षेत्रों से जुड़ें और यह कोशिश करें कि संगठन और आगे बढ़े। नवंबर में जो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है वह इसी सोच का परिणाम है। संगठन अब बड़े स्तर पर सोचने और उसे पूरा करने के प्रयास में जुटा है। भारत अगले दो दशक तक युवा रहने वाला है और हमारे पास मौका है कि इस दौरान ज्यादा से ज्यादा लोगों और युवाओं को अपने साथ जोड़ें। हम अब इसी मिशन मोड में काम करने वाले हैं जिसकी शुरुआत नवंबर से होने वाली है।’
सहकारिता से ही होगा
एनवाईसीएस के प्रतिनिधियों का आह्वान करते हुए राजेश पांड ने कहा कि जिला और राज्य प्रतिनिधि सहकारिता से जुड़ी छोटी-छोटी गतिविधियां करते रहें ताकि सहकारिता आंदोलन को मजबूती मिले और इस आंदोलन में संगठन की भागीदारी दिखती रहे। व्यक्तिगत तौर पर हमारा क्या योगदान हो सकता है, इस बारे में हमें हमेशा सोचते रहना चाहिए। हम सबको अपनी-अपनी ओर से पहल करना चाहिए तभी सहकारिता मजबूत होगी। केंद्रीय सहकारिता मंत्री का यही मिशन है कि देश का विकास सहकारिता के माध्यम से ही किया जा सकता है। इसलिए उनका पूरा फोकस सहकारिता को मजबूती देने पर है। सहकारिता मजबूत होगी तो देश के विकास में इस क्षेत्र का योगदान ज्यादा से ज्यादा बढ़ेगा। इसके लिए हम सबको पहल करनी होगी। सहकारिता में इतनी क्षमता है कि इसके माध्यम से कुछ भी संभव किया जा सकता है, बशर्ते जरूरत है सभी की सहभागिता और सही मार्गदर्शन की। जो इस क्षेत्र में सक्रिय रहेगा वही आगे बढ़ेगा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 में एनवाईसीएस का चुनाव होगा। तब एक नई टीम बनेगी जो संगठन को और आगे ले जाएगी। एक अच्छी टीम ही संगठन को बेहतर कल की ओर ले जा सकती है। हमारे वरिष्ठों ने जो जिम्मेदारी हमें सौंपी है उसे पूरा करना ही हमारा सपना है।
क्या है एनवाईसीएस
एनवाईसीएस एक मल्टीस्टेट, मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसायटी है। यह युवाओं को विभिन्न रोजगार या स्व–रोजगार संबंधी गतिविधियों में संलग्न कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में कार्य करती है। 1999 में स्थापित यह संगठन बहु–राज्यीय सहकारी समिति अधिनियम 1984 की धारा 7 के अंतर्गत पंजीकृत है। एनवाईसीएस की मुख्य गतिविधियों में युवाओं को सुविधा प्रदान करना, स्वयं सहायता समूह बनाना, उद्यमिता विकास और युवाओं एवं अन्य हितधारकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए क्षमता निर्माण करना है। एनवाईसीएस अपनी स्थापना के बाद से देश भर में उद्यमियों के विकास और पोषण पर ध्यान केंद्रित करता रहा है। इसका देश के 603 जिलों में एक मजबूत नेटवर्क है जिसके माध्यम से लाभार्थियों की पहचान की जाती है और उन्हें उद्यमिता प्रशिक्षण दिया जाता है। इनमें बहीखाता पद्धति, मार्केटिंग कौशल, सॉफ्ट स्किल, प्रबंधकीय कौशल, टीम प्रबंधन, नेतृत्व प्रबंधन और जीवन कौशल शामिल हैं। एनवाईसीएस का उद्देश्य युवाओं को आर्थिक रूप से उत्पादक बनाने तथा उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों और सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से रोजगारोन्मुखी और आय सृजन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लिए युवा सशक्तीकरण सुनिश्चित किया जाता है।
एनवाईसीएस की गतिविधियां और उपलब्धियां
सीएसआर परियोजनाएं: एनवाईसीएस-कोविडा ने बार्टी (बाबासाहेब अंबेडकर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान), महानगर गैस लिमिटेड, महाराष्ट्र प्राकृतिक गैस लिमिटेड, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के साथ विभिन्न सीएसआर (कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व) परियोजनाएं शुरू की हैं। वित्त वर्ष 23-24 तक सीएसआर परियोजनाओं के तहत 5,000 से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है।
पीएमकेवीवाई: एनवाईसीएस राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के साथ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) में प्रशिक्षण साझेदार है। यह कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशल प्रशिक्षण लेने में सक्षम बनाना है, ताकि उन्हें बेहतर आजीविका प्राप्त करने में मदद मिले। इसके तहत एनवाईसीएस ने 1 लाख से ज्यादा युवाओं की काउंसेलिंग की है और 50,000 से ज्यादा को ट्रेनिंग दी है।
कौशल्या सेतु अभियान: एसएससी परीक्षा पास करने में कठिनाई का सामना करने वाले छात्रों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए चलाई जा रही ‘कौशल्या सेतु अभियान‘ परियोजना में एनवाईसीएस कार्यान्वयन भागीदार है। इस परियोजना का उद्देश्य महाराष्ट्र के हाई स्कूल ड्रॉपआउट छात्रों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। यह परियोजना महाराष्ट्र के 34 जिलों के 111 प्रशिक्षण केंद्रों में कार्यान्वित की गई है।
पूर्व-शिक्षण मान्यता (आरपीएल) परियोजना: यह अनौपचारिक शिक्षा के माध्यम से सीखने को मान्यता प्रदान करने का एक मंच है, ताकि औपचारिक शिक्षा के समान ही स्वीकृति मिल सके। इसके तहत एनवाईसीएस ने ओला चालकों और टैक्सी, ऑटो-रिक्शा तथा वाणिज्यिक वाहनों के अन्य स्थानीय चालकों सहित 6,000 चालकों का प्रशिक्षण और मूल्यांकन पूरा कर लिया है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश के पांच शहरों लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, कानपुर और नोएडा में क्रियान्वित की जा रही है जिसमें 1500 से अधिक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
कौशल साथी: कौशल साथी पहल के तहत एनवाईसीएस अखिल भारतीय स्तर पर मानकों के साथ साइकोमेट्रिक टेस्ट और कुशल परामर्श के माध्यम से अभ्यर्थियों को परामर्श देती है, ताकि कौशल द्वारा रोजगार योग्यता को बढ़ाया जा सके।
गेल इंडियन स्पीडस्टार: एनवाईसीएस ने गेल इंडिया लिमिटेड के साथ साझेदारी में 11 से 17 वर्ष की आयु के बालक-बालिकाओं के लिए एक अनूठा अखिल भारतीय खेल प्रतिभा खोज कार्यक्रम ‘गेल रफ्तार इंडियन स्पीडस्टार‘ का वर्ष 2016 से 2019 तक सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा प्रतिभाओं की खोज, चयन, पोषण और संवर्धन करना तथा उन्हें एथलेटिक्स में ओलंपिक पदक जीतने के लिए प्रशिक्षित करना था। इस प्रतिभा खोज कार्यक्रम में गांव, जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर 4,50,000 से अधिक खेल प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इंडिया का खेलोत्सव: इस कार्यक्रम के माध्यम से हजारों एथलीटों ने प्रतिस्पर्धा की। इंडिया का खेलोत्सव स्पोर्ट्स एक्सपो में खेल प्रशासकों को सम्मानित किया गया। एनवाईसीएस एथलीटों को चैंपियन बनाने के लिए मजबूत समर्थन देती है। खेलोत्सव में एनवाईसीएस के एथलीट निसार अहमद ने अंडर-17 की 100 मीटर स्पर्धा में 10.96 सेकंड के साथ स्वर्ण पदक जीता। पी डेनिनल ने 800 मीटर में स्वर्ण और ताई बाम्हने ने 1500 मीटर में कांस्य पदक जीता।
जन औषधि केंद्र: किफायती द्वाओं के स्टोर प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने में एनवाईसीएस रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की एजेंसी बीपीपीआई (भारतीय फार्मा पीएसयू ब्यूरो) का एक कार्यान्वयन भागीदार है। एनवाईसीएस 7 राज्यों में 22 जन औषधि केंद्र खोलने में सफल रही है।
उज्ज्वला दीदी: सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ साझेदारी में ओडिशा में एनवाईसीएस की यह एक और सफल पहल थी। इस कार्यक्रम के तहत संगठन ने ओडिशा के सभी 30 जिलों और 450 ब्लॉकों में 6 महीने की अवधि में 10 हजर जमीनी ऊर्जा उद्यमियों को प्रशिक्षित किया।
जैव ऊर्जा उत्सव: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एनवाईसीएस और महरत्ता चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर के सहयोग से जुलाई 2017 में शिव छत्रपति क्रीड़ानगरी, बालेवाड़ी और पुणे में एक विशाल कार्यक्रम ‘जैव ऊर्जा उत्सव‘ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जैव ऊर्जा क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालना था ताकि एक समावेशी राष्ट्रीय नीतिगत ढांचा विकसित किया जा सके। एनवाईसीएस ने 10 अगस्त, 2017 को देश भर के 100 स्थानों पर जैव ऊर्जा कार्यक्रम आयोजित करके विश्व जैव ईंधन दिवस मनाया।
युवा मंथन: 2018 में आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम नीति निर्माताओं और कार्यान्वयनकर्ताओं के लिए विकासात्मक योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के मार्गदर्शक सिद्धांतों को समझने हेतु एक साझा मंच था।
रिसर्जेंट इंडिया युवा कॉन्क्लेव: युवाओं का सशक्तीकरण करने वाले इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य आने वाले दशक में युवाओं के लिए एक रोडमैप तैयार करना है। इस कॉन्क्लेव में सरकार, उद्योग, शिक्षा, नीति-निर्माता और नागरिक समाज के विभिन्न हितधारकों को युवाओं के आर्थिक समावेशन और सशक्तीकरण के लिए नीतियां बनाने के उद्देश्य से एक मंच पर लाया गया।
युवा एक्सपो: युवा एक्सपो एनवाईसीएस का एक इवेंट मैनेजमेंट डिवीजन है। इसने 2006 में नई दिल्ली, 2008 में रायपुर, 2011 में नई दिल्ली और 2013 में भोपाल में युवा को-ऑप एक्सपो का आयोजन किया था। इस एक्सपो में प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया और युवा सशक्तीकरण पर अपने बहुमूल्य अनुभव साझा किए, जिससे प्रतिनिधियों को भारत में उद्यमिता और देश के आर्थिक विकास में युवाओं की भूमिका के बारे में प्रोत्साहन मिला।
ग्रामीण होमस्टे परियोजना: बैक टू विलेज (बी2वी) के सहयोग से एनवाईसीएस मध्य प्रदेश के बैतूल और छिंदवाड़ा के 4 आदिवासी गांवों में मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड की ग्रामीण होमस्टे परियोजना पर काम कर रही है। इस परियोजना के तहत प्रत्येक गांव में कम से कम 10 होमस्टे बनाए जा रहे हैं। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत के रूप में इसके तहत विभिन्न सामूहिक गतिविधियों (ग्रामीण खेल, लोक नृत्य, लोक संगीत, नाटक, भजन आदि) पर भी काम किया जा रहा है।


