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FISHCOPFED में प्रशासक की नियुक्ति, लंबे विवाद के बाद व्यवस्था पटरी पर लौटने की उम्मीद

फिशकॉपफेड देश की मछुआरा सहकारी संस्थाओं का शीर्ष संगठन है। इसकी स्थापना 1980 में हुई थी और यह मछुआरों के कल्याण, प्रशिक्षण, सहकारी आंदोलन को मजबूत करने और केंद्र व राज्यों की मत्स्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाता है

Published: 15:34pm, 27 Jan 2026

राष्ट्रीय मत्स्य सहकारी संघ लिमिटेड (FISHCOPFED) में चल रहे लंबे प्रशासनिक और चुनावी विवाद के बीच अब स्थिति संभलती नजर आ रही है। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने FISHCOPFED में एक प्रशासक की नियुक्ति कर दी है, जिससे संघ में वैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद जगी है।

सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय सहकारी समितियां रजिस्ट्रार की सलाह पर, मंत्रालय ने सुभाष चंद्र, मत्स्य निदेशक, आईओएफएस-2003 को FISHCOPFED का प्रशासक नियुक्त किया है। यह नियुक्ति बहु-राज्य सहकारी समितियां अधिनियम, 2002 की धारा 123 के तहत की गई है। अब वे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की जगह संघ का संचालन करेंगे।

प्रशासक का कार्यकाल छह महीने का होगा, जिसे अधिकतम एक साल तक बढ़ाया जा सकता है। खास बात यह है कि उन्हें कोई अतिरिक्त वेतन नहीं मिलेगा। उनकी सबसे अहम जिम्मेदारी होगी-जल्द से जल्द निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र चुनाव कराकर नया बोर्ड गठित करना।

इस फैसले के बाद संघ के दो वरिष्ठ अधिकारियों पी.के. चौधरी और एस.एस. महूर की भूमिका और सेवा-विस्तार पर सवाल और गहरे हो गए हैं। आरोप है कि दोनों बिना किसी विधिवत आदेश के लंबे समय से FISHCOPFED में बने हुए थे। महूर पर यह भी आरोप है कि वे “पदोन्नति से निदेशक” के पद पर कार्य कर रहे थे, जबकि ऐसा कोई पद FISHCOPFED के सेवा नियमों में है ही नहीं।

कर्मचारियों के एक वर्ग का आरोप है कि इन दोनों अधिकारियों ने संघ के चुनावों में कथित रूप से हेरफेर किया और इसके बदले में पदोन्नति व सेवा-विस्तार हासिल किया। यही नहीं, दोनों अधिकारी फिलहाल FISHCOPFED से जुड़े चुनावी विवाद में चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया में भी पक्षकार हैं।

गौरतलब है कि 15 दिसंबर 2025 को मध्यस्थ ने दोनों अधिकारियों को काम करने से रोक दिया था। बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर को इस आदेश में आंशिक बदलाव करते हुए कहा कि यदि उनकी सेवाएं जारी रहती हैं, तो वह पूरी तरह प्रशासक की निगरानी और अनुमति के अधीन होंगी।

प्रशासक की नियुक्ति से संघ के भीतर कामकाज सामान्य होने की उम्मीद भी बढ़ी है। मीडिया से बातचीत में सहायक निदेशक एम.ए. खान सहित कई अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि अब वे बिना रोक-टोक दफ्तर आकर अपना काम कर पाएंगे। खान का आरोप है कि पहले उन्हें जबरन कार्यालय आने से रोका गया था।

FISHCOPFED देश की मछुआरा सहकारी संस्थाओं का शीर्ष संगठन है। इसकी स्थापना 1980 में हुई थी और यह मछुआरों के कल्याण, प्रशिक्षण, सहकारी आंदोलन को मजबूत करने और केंद्र व राज्यों की मत्स्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में प्रशासक की नियुक्ति को केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि संघ को दोबारा सही दिशा में ले जाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

Diksha

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