उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किसानों से आह्वान किया है कि वे केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि कृषि उत्पादों के विपणन, मूल्य संवर्धन एवं व्यापारिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मार्ग खेतों और गांवों से होकर ही गुजरता है, और इस दिशा में किसानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थायित्व में कृषि और ग्रामीण भारत की निर्णायक भूमिका है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे कृषि को पारंपरिक कार्य न मानें, बल्कि इसे एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाएं और ‘कृषि उद्यमी’ की सोच विकसित करें।
धनखड़ ने स्पष्ट किया कि किसानों का कार्य केवल उत्पादन तक सीमित रह जाने से वे देश की आर्थिक मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाते। उन्होंने सुझाव दिया कि अब समय आ गया है कि किसान न केवल उत्पादन करें, बल्कि विपणन, मूल्य संवर्धन और कृषि आधारित उद्योगों में भी अपनी सीधी भागीदारी सुनिश्चित करें।
उन्होंने दूध, फल-सब्ज़ी, उर्वरक और कृषि उपकरणों जैसे क्षेत्रों में किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने पशुधन क्षेत्र को भी एक बड़े अवसर के रूप में रेखांकित किया और कहा कि न्यूजीलैंड जैसे देशों ने इसी क्षेत्र में नवाचार कर वैश्विक पहचान बनाई है।
उन्होंने ग्रामीण युवाओं से इस क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और उद्यमिता को अपनाने का आह्वान किया। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों से शिक्षित युवा भी कृषि व्यापार में उतर रहे हैं, तो फिर किसान परिवारों के बच्चे क्यों पीछे रहें?
धनखड़ ने सरकार की विभिन्न योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि आज की नीतियां कृषि को सशक्त बनाने हेतु अनुकूल हैं। उन्होंने किसानों से भंडारण, ऋण एवं सहकारी सुधारों का भरपूर लाभ उठाने का आग्रह किया।
अंत में उन्होंने बड़े उद्योगपतियों से भी सीएसआर निधियों का उपयोग ग्रामीण विकास और किसानों की आय वृद्धि के लिए करने की अपील की।


