यह साझेदारी ग्रामीण भारत में महिलाओं और युवाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगी, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में व्यापक सुधार होगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय (MORD) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष, युवा (YuWaah) ने ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक तीन साल की रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस पहल का मुख्य लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़कर उनके लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करना है।
साझेदारी का उद्देश्य
यह साझेदारी स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को नौकरियों, स्वरोजगार, उद्यमिता और कौशल विकास से जोड़ने पर केंद्रित है। इसका मकसद ग्रामीण महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी को बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसके जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को भी रोजगार और कौशल के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
इन राज्यों की महिलाओं को मिलेगा लाभ
इस सहयोग के तहत पांच राज्यों—आंध्र प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान—के चुनिंदा पांच ब्लॉकों में पायलट परियोजना शुरू की जाएगी। इसमें “कंप्यूटर दीदी केंद्र” और “दीदी की दुकान” की स्थापना के जरिए डिजिटल ढांचे को मजबूत किया जाएगा। परियोजना के सफल होने पर इसे देश के 7,000 से अधिक ब्लॉकों तक विस्तारित किया जाएगा, जिससे लगभग 35 लाख ग्रामीण महिलाओं को फायदा पहुंचेगा।
बजट 2025-26 के अनुरूप है यह पहल
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अपर सचिव टी के अनिल कुमार ने कहा कि यह साझेदारी बजट 2025-26 में घोषित ग्रामीण समृद्धि और स्थिरता कार्यक्रम के अनुरूप है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 10 करोड़ एसएचजी सदस्यों में से करीब एक तिहाई युवा हैं, जो इस पहल में अहम भूमिका निभाएंगे। यह साझेदारी ग्रामीण विकास के लिए एक नया रास्ता खोलेगी।
स्वयं सहायता समूह होंगे आधार
यूएनआईसीईएफ की उप प्रतिनिधि (संचालन) शारदा थापलिया ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय का 10 करोड़ से अधिक एसएचजी महिलाओं का नेटवर्क एक मजबूत सामाजिक ढांचा है। इसे उन लोगों तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिन्हें इन अवसरों की सबसे ज्यादा जरूरत है। यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
खास पहलें
यूथ हब: यह नौकरियों, कौशल और स्वयंसेवा के लिए एक आधुनिक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म होगा।
लखपति दीदी योजना: हजारों महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए स्केलेबल मॉडलों का परीक्षण किया जाएगा।
यह साझेदारी ग्रामीण भारत में महिलाओं और युवाओं के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगी, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में व्यापक सुधार होगा।


