सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.6 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 5.1 प्रतिशत थी। इस वृद्धि के पीछे भीषण गर्मी, मौसमी बदलाव, मानसून की देरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों में कमी को प्रमुख कारण बताया गया है। ‘वर्तमान साप्ताहिक स्थिति’ (CWS) पर आधारित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार, इस दौरान श्रम बाजार पर भारी दबाव देखा गया।
मई में तापमान असामान्य रूप से बढ़ने और मानसून के देर से आने के कारण बाहरी श्रम गतिविधियां प्रभावित हुईं। रबी फसलों की कटाई पूरी होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम हुए, जिसका असर खासकर अस्थायी और अवैतनिक श्रमिकों पर पड़ा। मंत्रालय ने बताया कि मई में श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) घटकर 54.8% रह गई, जो अप्रैल में 55.6% थी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 58% से गिरकर 56.9% और शहरी क्षेत्रों में 50.7% से घटकर 50.4% रही।
बेरोजगारी का सबसे अधिक असर युवाओं और ग्रामीण महिलाओं पर देखा गया। 15-29 वर्ष आयु वर्ग में बेरोजगारी दर मई में बढ़कर 15% हो गई, जो अप्रैल में 13.8% थी। शहरी युवाओं में यह दर 17.2% से बढ़कर 17.9% और ग्रामीण युवाओं में 12.3% से बढ़कर 13.7% रही। वहीं, 15-29 वर्ष की महिलाओं में बेरोजगारी दर अप्रैल के 14.4% से बढ़कर 16.3% हो गई।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े मौसमी उतार-चढ़ाव, शैक्षणिक और सामाजिक-आर्थिक कारकों को दर्शाते हैं। सरकार का कहना है कि दीर्घकालिक रोजगार योजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से स्थिति में सुधार के प्रयास जारी हैं।


