भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वांइट की कटौती की घोषणा की है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि रेपो रेट 5.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया है।
ब्याज दरों में यह कमी आम लोगों को राहत देने वाली है, क्योंकि होम लोन समेत अन्य कर्जों की EMI में कमी आने की संभावना बढ़ गई है। इससे बाजार में मांग बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार तेज होने की उम्मीद भी की जा रही है। हालांकि, RBI ने नीतिगत रुख ‘Neutral’ ही बनाए रखा है।
घोषणा के दौरान गवर्नर ने बताया कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मांग में सुधार देखने को मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग बढ़ा है जबकि शहरी अर्थव्यवस्था में भी तेजी लौट रही है। गैर-खाद्य क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने, बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता और क्षमता उपयोग में निरंतर सुधार के चलते निजी निवेश में मजबूती आई है, जिससे अर्थव्यवस्था में सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
इस वर्ष रेपो रेट में चार बार कटौती
इस वर्ष रेपो रेट में यह चौथी कटौती है। फरवरी में इसे 6.50 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत किया गया था। इसके बाद अप्रैल में 0.25 प्रतिशत की दूसरी कटौती हुई। जून में 0.50 प्रतिशत की तीसरी कटौती की गई और अब एक बार फिर 0.25 प्रतिशत की कमी की गई है। इस तरह कुल मिलाकर अब तक रेपो रेट में 1.25 प्रतिशत की कमी हो चुकी है।
RBI ने GDP बढ़ोतरी का कितना जताया अनुमान
RBI ने आर्थिक विकास के अनुमानों में भी संशोधन किया है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के विकास अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के लिए अनुमान 6.4 से बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत, जबकि चौथी तिमाही के लिए पूर्वानुमान 6.2 से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी तरह, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के अनुमान को 6.4 से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया गया है, जबकि दूसरी तिमाही के लिए विकास दर का अनुमान 6.8 प्रतिशत रखा गया है।


