देश के सराफा बाजार और कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में चांदी की तेज रफ्तार ने सभी को चौंका दिया है। सोमवार को चांदी की कीमतें 3 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर गईं। इस उछाल को लेकर बाजार में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह तेजी केवल अंतरराष्ट्रीय कारणों से है या इसके पीछे कुछ अन्य गतिविधियां जिम्मेदार हैं।
फिलहाल चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क की तुलना में भारी प्रीमियम पर कारोबार कर रही हैं। इस असामान्य स्थिति को देखते हुए देश के प्रमुख ज्वैलर्स संगठनों ने बाजार में गड़बड़ी की आशंका जताई है और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIGJF) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इस तेजी की जांच कराने का आग्रह किया है।

आयात शुल्क बढ़ने की अफवाह से बढ़ी हलचल
फेडरेशन ने बताया कि वह लगभग दस दिन पहले ही बाजार नियामक SEBI को सचेत कर चुका है। संगठन का दावा है कि चांदी के बाजार में कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी जा रही हैं, जो बड़े स्तर पर हेरफेर की ओर इशारा करती हैं। मंगलवार को भी MCX पर चांदी अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले करीब 28 हजार रुपये प्रति किलो के भारी प्रीमियम पर ट्रेड कर रही थी। गुरुवार को एमसीएक्स पर चांदी का भाव 3.19 लाख रुपये दर्ज किया गया।
बाजार में यह चर्चा आम है कि सरकार चांदी पर आयात शुल्क बढ़ा सकती है, और इसी आशंका के चलते कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।
किसे हो रहा है सबसे ज्यादा फायदा?
वित्त मंत्री को लिखे पत्र में AIGJF के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा और राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में चांदी के दामों में अधिक तेजी का प्रमुख कारण आयात शुल्क बढ़ने की अफवाह है। यदि वास्तव में ऐसा कोई प्रस्ताव है, तो यह जांचना जरूरी है कि इसकी जानकारी पहले किसे मिली और इस मूल्य वृद्धि से सबसे अधिक लाभ किसे हो रहा है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कुछ बड़े ट्रेडर्स और ब्रोकर्स ने मिलकर अफवाहों के आधार पर कीमतों को जानबूझकर ऊपर चढ़ाया, ताकि भारी मुनाफा कमाया जा सके। इसके लिए एमसीएक्स के ट्रेडिंग डेटा की गहन जांच की मांग की गई है।


