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गांधीनगर में होगा SEA- कैस्टर उद्योग वैश्विक सम्मेलन, उत्पादन, तकनीक और टिकाऊ खेती पर होगी विशेष चर्चा

भारत वैश्विक कैस्टर परिदृश्य में अग्रणी राष्ट्र है। विश्व की कुल कैस्टर ऑयल मांग का 90 प्रतिशत से अधिक भारत द्वारा पूर्ति की जाती है। भारत से कैस्टर ऑयल एवं इसके डेरिवेटिव्स का वार्षिक निर्यात लगभग 15,000 करोड़ रुपये (प्रायः 1.8 अरब अमेरिकी डॉलर) है। वैश्विक कैस्टर डेरिवेटिव्स बाजार का आकार 6 अरब डॉलर से अधिक है, जो मुख्यतः भारत पर निर्भर है।

Published: 11:58am, 09 Jan 2026

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) द्वारा गुजरात के गांधीनगर में 27 और 28 फरवरी 2026 को 24वां SEA-ग्लोबल कैस्टर कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन वैश्विक कैस्टर उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों के लिए विचार-विमर्श, सहयोग और रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।

इस संबंध में जानकारी देते हुए सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बी.वी. मेहता ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कैस्टर उद्योग से जुड़े मौजूदा मुद्दों, बाजार की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन चर्चा करना है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में देश-विदेश से आने वाले विशेषज्ञ वक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और पैनल सदस्यों के साथ सार्थक संवाद के माध्यम से व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान तलाशे जाएंगे।

मेहता के अनुसार, यह सम्मेलन वैश्विक कैस्टर उद्योग के लिए एक साझा और संवादपरक मंच के रूप में कार्य करेगा। इसमें कैस्टर ऑयल के निर्माता, आयातक, निर्यातक, तकनीकी विशेषज्ञ, कमोडिटी एक्सचेंज से जुड़े प्रतिनिधि, ब्रोकर, कैस्टर बीज उत्पादक किसान तथा व्यापारी शामिल होंगे। सम्मेलन के दौरान उत्पादन लागत, बाजार में उतार-चढ़ाव, गुणवत्ता मानक, सप्लाई चेन प्रबंधन, वैश्विक मांग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।

भारत की भूमिका को रेखांकित करते हुए मेहता ने कहा कि वैश्विक कैस्टर उद्योग में भारत निर्विवाद रूप से अग्रणी देश है। वर्तमान में दुनिया में कैस्टर ऑयल की कुल मांग का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत द्वारा पूरा किया जा रहा है। भारत से कैस्टर ऑयल और इसके डेरिवेटिव्स का वार्षिक निर्यात लगभग 15,000 करोड़ रुपये, यानी करीब 1.8 अरब अमेरिकी डॉलर का है। वहीं वैश्विक कैस्टर डेरिवेटिव्स बाजार का आकार 6 अरब डॉलर से अधिक आंका जा रहा है, जिसमें भारत की भूमिका निर्णायक बनी हुई है।

सम्मेलन में केवल व्यापारिक पहलुओं तक ही चर्चा सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कृषि, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार पर भी विशेष फोकस किया जाएगा। कम अवधि वाली किस्मों से जुड़ी चुनौतियां, उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के उपाय, नई तकनीकों का उपयोग, स्थायी खेती के मॉडल और गुणवत्ता सुधार जैसे विषयों पर विशेषज्ञ शोधकर्ताओं और उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

SEA-ग्लोबल कैस्टर कॉन्फ्रेंस 2026 में भारत और विदेशों से लगभग 400 प्रतिनिधियों और विशेष आमंत्रित अतिथियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें नीति-निर्माता, उद्योग जगत के वरिष्ठ नेता, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और वैश्विक खरीदार शामिल रहेंगे। सम्मेलन के दौरान वन-टू-वन बिजनेस मीटिंग्स का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे नए व्यावसायिक अवसर सृजित होंगे और मौजूदा कारोबारी संबंधों को मजबूती मिलेगी।

YuvaSahakar Desk

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