भारत सरकार ने सहकारिता (Cooperative) के प्रति जनजागरूकता को शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। पहली बार देशभर में कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को सहकारिता की शिक्षा दी जाएगी। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (एनसीसीटी) और राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के सहयोग से सहकारिता पर एक विशेष द्विभाषी शैक्षिक मॉड्यूल पेश किया है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के शिलान्यास समारोह के दौरान इस मॉड्यूल का औपचारिक अनावरण किया। हिंदी और अंग्रेजी में तैयार किए गए इस मॉड्यूल को संवादात्मक, सुलभ और छात्र-अनुकूल बनाया गया है। यह स्कूली पाठ्यक्रम में सहकारी शिक्षा को शामिल करने और युवाओं को सहकारी मूल्यों से परिचित कराने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह मॉड्यूल छात्रों को प्राचीन भारत से सहकारी समितियों की अवधारणा, उनकी संवैधानिक स्थिति, सिद्धांतों और मूल्यों तथा स्वतंत्रता से पहले और बाद में उनकी भूमिका जैसे विषयों से परिचित कराता है। इसमें प्रमुख सहकारी नेताओं, सहकारी समितियों के विभिन्न रूपों और मंत्रालय की हालिया पहलों को भी शामिल किया गया है।
सहकारिता मंत्रालय ने कक्षा छह और उससे ऊपर के छात्रों के लिए पाठ्यक्रम में सहकारी विषय शामिल करने और कक्षा 11 और 12 के लिए वैकल्पिक विषय के रूप में सहकारिता शुरू करने की योजना की भी घोषणा की। इससे छात्र त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों से और अधिक जुड़ सकेंगे। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि “सहकारिता एक विचार नहीं, एक आंदोलन है” का संदेश देश के हर युवा शिक्षार्थी तक पहुंचे।
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य युवाओं को न केवल ज्ञान बल्कि रोजगारपरक, सामाजिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध करना है। मॉड्यूल में सहकारिता के ऐतिहासिक विकास से लेकर वर्तमान तक की यात्रा को रोचक और शिक्षाप्रद रूप में प्रस्तुत किया गया है। इससे विद्यार्थियों को सहकारी आंदोलन, उसकी उपलब्धियों, रोजगार के अवसरों और योजनाओं की विस्तृत जानकारी मिलेगी।
इस मॉड्यूल में छह अध्याय हैं, जिनमें 19वीं सदी के सहकारी आंदोलन के प्रारंभिक नायक राव बहादुर श्रीपाद सुब्रमण्यम तल्मकी, सरदार वल्लभभाई पटेल, महात्मा गांधी, त्रिभुवनदास पटेल, वी. लालूभाई मेहता और कमलादेवी चट्टोपाध्याय जैसे महान नेताओं की भूमिका का उल्लेख है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को सहकारिता की विचारधारा, इतिहास और वर्तमान प्रभाव से जोड़ने का कार्य करेगा।


