वरिष्ठ सहकारी नेता और सहकार भारती के संस्थापक सदस्य सतीश मराठे को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के निदेशक मंडल का सदस्य नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से परामर्श कर तीन वर्षों के लिए या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, की है।
मराठे फिलहाल भारतीय रिज़र्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। उनके पास बैंकिंग, सहकारिता विकास और ग्रामीण वित्त का दशकों का अनुभव है, जो नाबार्ड के कामकाज को नई दिशा देगा।
1 फरवरी 1950 को जन्मे मराठे ने बॉम्बे विश्वविद्यालय से वाणिज्य और विधि (सामान्य) में स्नातक तथा भारती विद्याभवन से पत्रकारिता में स्वर्ण पदक सहित डिप्लोमा प्राप्त किया।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बैंक ऑफ इंडिया से की और आगे चलकर जनकल्याण सहकारी बैंक लिमिटेड के सीईओ बने, जहां उनके नेतृत्व में बैंक ने उल्लेखनीय प्रगति की। बाद में वे यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक लिमिटेड (2002–2006) के चेयरमैन और सीईओ भी रहे।
साल 1979 में उन्होंने सहकार भारती की स्थापना की, जो आज देश का सबसे बड़ा सहकारी क्षेत्र का एनजीओ है और इससे 35,000 से अधिक सहकारी संस्थाएं जुड़ी हुई हैं।
मराठे कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर की नीतिगत चर्चाओं से जुड़े रहे हैं और वित्त मंत्रियों के साथ बजट पूर्व बैठकों में सहकारी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते आए हैं।
वर्तमान में वे आरबीआई केंद्रीय बोर्ड के अलावा नेशनल हाउसिंग बैंक, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स ऑफ आईसीएआई, लक्ष्मणराव इनामदार राष्ट्रीय सहकारी शोध एवं विकास अकादमी (LINAC) और नई सहकारिता नीति का मसौदा तैयार करने वाली राष्ट्रीय समिति में भी अहम जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
साल 2015 में उनके योगदान को मान्यता देते हुए आईएफएफसीओ ने उन्हें “सहकारिता रत्न पुरस्कार” से सम्मानित किया था। वे महाराष्ट्र से यह सम्मान पाने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं।
नाबार्ड में उनकी नियुक्ति से ग्रामीण ऋण, कृषि वित्त और सहकारी बैंकिंग के क्षेत्र में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीण समृद्धि और वित्तीय समावेशन को और मजबूती मिलेगी।


