ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सहकारी बैंक आज तेजी से आधुनिकता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। इस बदलाव के केंद्र में है “सहकार साथी”—एक ऐसी पहल, जो ग्रामीण सहकारी बैंकों को तकनीक, पारदर्शिता और भरोसे के साथ सशक्त बना रही है।
कभी लंबी कतारें, सीमित समय और कागजी कामकाज के लिए पहचाने जाने वाले ग्रामीण सहकारी बैंक अब आधुनिक कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) के जरिए नई पहचान बना रहे हैं। एक ही आधुनिक प्लेटफॉर्म से बैंकिंग सेवाएँ तेज, आसान और सुरक्षित हुई हैं। खाताधारकों को अब डिजिटल भुगतान की सुविधा मिल रही है, जिससे गाँवों में भी कैशलेस लेन-देन का भरोसा बढ़ा है।
AePS, UPI और अन्य डिजिटल माध्यमों ने रोजमर्रा के लेन-देन को सहज बना दिया है। किसान, मज़दूर, महिलाएँ और बुजुर्ग सब अब अपने गाँव के सहकारी बैंक से ही पैसे जमा करने, निकालने और भुगतान करने में सक्षम हैं। यह बदलाव केवल सुविधा तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक समावेशन की दिशा में एक ठोस कदम है।
साइबर सुरक्षा और आईटी समर्थन पर विशेष जोर देते हुए सहकार साथी ने डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाया है। इससे न सिर्फ ग्राहकों का विश्वास बढ़ा है, बल्कि बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
गाँव के चौक पर खड़े सहकारी बैंक की इमारत के बाहर खड़े लोग आज पासबुक, मोबाइल और पहचान पत्र के साथ आत्मविश्वास से भरे दिखाई देते हैं। महिलाएँ स्वयं लेन-देन कर रही हैं, किसान समय पर भुगतान पा रहे हैं और युवा डिजिटल सेवाओं से जुड़कर आगे बढ़ रहे हैं।
यह कहानी सिर्फ तकनीक की नहीं, बल्कि सहकारिता की सोच की है। जहाँ सामूहिक प्रयास से व्यवस्था मजबूत होती है और लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है। सहकार साथी के माध्यम से ग्रामीण सहकारी बैंक आज विकास के नए अध्याय लिख रहे हैं।
यही है सहकार से समृद्धि का रास्ता- जहाँ तकनीक, भरोसा और सहभागिता मिलकर ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बना रहे हैं।


