जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से गंभीर तबाही हुई है। गुरुवार दोपहर 12:30 बजे आई इस प्राकृतिक आपदा में लगभग 10 लोगों के मारे जाने की आशंका है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है। पड्डर सब-डिवीजन के चशोटी गांव में पहाड़ से पानी और मलबा बहने से मचैल माता मंदिर की धार्मिक यात्रा के लिए जुटे लोग प्रभावित हुए। प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है, जिसमें स्थानीय लोग भी सहायता कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 323 सड़कें, 70 बिजली वितरण ट्रांसफॉर्मर (DTRs) और 130 पेयजल योजनाएं बाधित हुई हैं।
मॉनसून की शुरुआत यानि 20 जून से अब तक राज्य में कुल 241 लोगों की जान गई है, जिनमें से 126 मौतें भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और मकान गिरने जैसी बारिश से जुड़ी घटनाओं में हुईं, जबकि 115 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई।
राज्य आपात संचालन केंद्र (SEOC) के शाम 5 बजे के अपडेट के अनुसार, दो राष्ट्रीय राजमार्ग — एनएच-305 (कुल्लू) और एनएच-505 (लाहौल-स्पीति) बंद हैं। कुल्लू में सबसे ज्यादा 70 सड़कें बंद हैं, जबकि मंडी में 179 और कांगड़ा में 25 सड़कें बाधित हैं। बिजली आपूर्ति में मंडी जिले में सबसे ज्यादा 50 ट्रांसफॉर्मर ठप हैं, जबकि कुल्लू और लाहौल-स्पीति में स्थानीय स्तर पर खराबी दर्ज हुई है। पानी की आपूर्ति में भी मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 72 योजनाएं बंद हैं, इसके बाद लाहौल-स्पीति में 5 और हमीरपुर में 2 योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
बारिश के चलते बहाली का कार्य प्रभावित हो रहा है और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लगातार बरसात से मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए चेतावनी जारी की है और संवेदनशील इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मंडी में बारिश से जुड़ी घटनाओं में सबसे ज्यादा 26 लोगों की मौत हुई है, इसके बाद कांगड़ा में 28 और चंबा में 9 लोगों की जान गई है। सड़क हादसों में मंडी में 21, चंबा में 17 और कांगड़ा में 11 लोगों की मौत दर्ज की गई है।


