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PM मोदी ने किया धन-धन्य कृषि योजना का शुभारंभ, जानें कैसे बदलेगी 100 जिलों के किसानों की तकदीर ?

धन-धन्य कृषि योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसानों को अपने अधिकार और सुविधाओं के लिए कई विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी योजनाओं का लाभ उन्हें एक ही स्थान पर मिलेगा। इससे योजनाओं का दोहराव रुकेगा और कोई भी पात्र किसान योजना-लाभ से वंचित नहीं रहेगा। छह वर्ष की इस 24,000 करोड़ की इस योजना का लक्ष्य देश के 100 पिछड़े जिलों में कृषि उत्पादकता बढ़ाना, सिंचाई, भंडारण और ऋण पहुंच में सुधार लाना है। यूपी के 12 जिले इसमें शामिल हैं।

Published: 14:23pm, 11 Oct 2025

भारत के समग्र विकास में कृषि की केंद्रीय भूमिका को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार अपनी आर्थिक नीति का मुख्य आधार किसानों की सशक्तिकरण को बना रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर को महत्वाकांक्षी “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना” का शुभारंभ किया। इस योजना को केंद्र सरकार ने 16 जुलाई, 2025 को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य देश के 100 सबसे कम प्रदर्शन करने वाले कृषि जिलों को विकास की मुख्यधारा में लाना और किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को साकार करना है।

योजना का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का भविष्य किसानों की समृद्धि से जुड़ा है। जब गांव और खेत खुशहाल होंगे, तभी राष्ट्र प्रगति करेगा। यह योजना इसी दृष्टि को साकार करने का एक समग्र प्रयास है, जिसके अंतर्गत कृषि उत्पादन, भंडारण, सिंचाई, ऋण, फसल विविधीकरण और ग्रामीण आजीविका को एक एकीकृत ढांचे में जोड़ा गया है।

एक ही छत के नीचे 36 सरकारी योजनाओं के लाभ

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को “महा-योजना” कहा जा रहा है, क्योंकि यह 11 अलग-अलग मंत्रालयों की 36 केंद्रीय योजनाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाती है। इस योजना का वार्षिक बजट 24,000 हजार करोड़ निर्धारित किया गया है और यह छह वर्षों तक लागू रहेगी।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब किसानों को विभिन्न योजनाओं के लाभ के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी सुविधाएं एकीकृत प्रणाली के माध्यम से एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

इससे देशभर में 1.7 करोड़ किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। योजना में राज्यों की योजनाओं, सहकारी संस्थाओं और निजी क्षेत्र की सहभागिता को भी शामिल किया जाएगा, ताकि “सबका प्रयास” के सिद्धांत को धरातल पर उतारा जा सके।

100 जिलों की कृषि सूरत बदलने के लिए पांच मुख्य स्तंभ

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का मूल उद्देश्य केवल खेती में सुधार करना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देना है। इसके पांच प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:

  1. कृषि उत्पादकता में वृद्धि:
    किसानों को बेहतर बीज, खाद, आधुनिक कृषि यंत्र और वैज्ञानिक सलाह देकर प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाना।

  2. फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन:
    पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर किसानों को बाजार की मांग के अनुसार नई फसलें उगाने हेतु प्रेरित करना, ताकि जोखिम घटे और आमदनी बढ़े।

  3. भंडारण क्षमता में विस्तार:
    पंचायत और ब्लॉक स्तर पर कोल्ड स्टोरेज व गोदामों का निर्माण कर किसानों को अपनी उपज बेहतर मूल्य पर बेचने की सुविधा देना।

  4. सिंचाई व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण:
    “हर खेत को पानी” के लक्ष्य के अनुरूप सिंचाई नेटवर्क को मजबूत बनाना और मॉनसून पर निर्भरता कम करना।

  5. कृषि ऋण तक सरल पहुंच:
    किसानों को समय पर, पारदर्शी और ब्याज दरों में रियायत के साथ ऋण उपलब्ध कराना, जिससे कृषि निवेश को प्रोत्साहन मिले।

चयनित जिलों में यूपी का सर्वाधिक हिस्सा

सरकार ने इस योजना के लिए देश के 100 जिलों का चयन किया है, जो कृषि उत्पादकता, सिंचाई और ऋण प्राप्ति में सबसे पिछड़े माने जाते हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक 12 जिले शामिल महोबा, सोनभद्र, हमीरपुर, बांदा, जालौन, झांसी, उन्नाव, प्रयागराज, चित्रकूट, प्रतापगढ़, श्रावस्ती और ललितपुर हैं।

इसके अलावा महाराष्ट्र से 9 जिले, मध्य प्रदेश और राजस्थान से 8-8, बिहार से 7, तथा आंध्र प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल से 4-4 जिले शामिल किए गए हैं।
असम, छत्तीसगढ़ और केरल से 3-3 जिले, जबकि जम्मू-कश्मीर, झारखंड और उत्तराखंड से 2-2 जिले चुने गए हैं।

अरुणाचल प्रदेश, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे राज्यों से 1-1 जिले को शामिल किया गया है। हर जिले के कृषि-जलवायु पैटर्न और फसल विविधता को ध्यान में रखते हुए स्थानीय योजनाएं तैयार की जाएंगी।

मजबूत प्रशासनिक ढांचा और निगरानी तंत्र

केंद्र सरकार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक त्रिस्तरीय प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है।
जिले स्तर पर, जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में “जिला धन-धान्य कृषि समिति” बनाई जाएगी, जिसमें प्रगतिशील किसान, कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति स्थानीय आवश्यकताओं और कृषि परिस्थितियों के अनुरूप जिला-स्तरीय योजना तैयार करेगी।

राज्य स्तर पर एक संचालन समूह कार्य करेगा, जो जिलों के बीच समन्वय स्थापित करेगा। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय मंत्रियों और सचिवों की दो उच्चस्तरीय टीमें योजना की प्रगति की समीक्षा करेंगी।
केंद्रीय डैशबोर्ड के माध्यम से 117 संकेतकों पर हर जिले की प्रगति की मासिक समीक्षा की जाएगी। साथ ही प्रत्येक जिले के लिए एक केंद्रीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो नियमित निरीक्षण और निगरानी करेगा।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की प्रगति ग्रामीण भारत की मजबूती से तय होती है। उन्होंने कहा कि “यह योजना केवल कृषि सुधार नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी में परिवर्तन लाने की दिशा में क्रांति का आरंभ है।” उन्होंने राज्यों से आह्वान किया कि वे इस योजना को “जनभागीदारी अभियान” के रूप में अपनाएं, ताकि हर किसान तक इसका लाभ पहुंचे और भारत कृषि क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू सके।

YuvaSahakar Desk

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