कर्नाटक के सामाजिक, शैक्षणिक और सहकारिता क्षेत्र में दशकों से सक्रिय दो प्रमुख व्यक्तित्वों मांड्या जिले के हरलहल्ली गांव के एम अंके गौड़ा और बेलगावी के वरिष्ठ शिक्षाविद एवं सहकारिता नेता डॉ. प्रभाकर कोरे का वर्ष 2026 के पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयन किया गया है।

अंके गौड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए किए गए उनके निरंतर प्रयासों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने हरलहल्ली गांव में ‘पुस्तक माने’ नामक निःशुल्क सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना कर ग्रामीणों को पुस्तकों से जोड़ा। सहकारी बैंकिंग आंदोलन से जुड़े रहते हुए उन्होंने ग्रामीण समुदायों में बचत की आदत, वित्तीय जागरूकता और सामूहिक विकास की भावना को मजबूत किया। सहकारिता के मूल्यों और पठन-पाठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें एक जमीनी स्तर के संस्था निर्माता के रूप में पहचान दिलाई।
डॉ. प्रभाकर कोरे को शिक्षा, कृषि और सहकारिता आंदोलन में उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने 2011 में बेलगावी जिले के मट्टिकोप्प में आईसीएआर–केएलई कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना की, जो किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। कृषि शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उन्होंने केएलई स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर की भी स्थापना की।
सहकारिता क्षेत्र में डॉ. कोरे द्वारा स्थापित चिदानंद बसप्रभु कोरे सहकारी चीनी मिल, चिक्कोडी को एक आदर्श सहकारी संस्था माना जाता है। उन्होंने नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड, नई दिल्ली में निदेशक के रूप में भी भूमिका निभाई। इसके अलावा, महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए रानी चन्नम्मा महिला सहकारी बैंक, बेलगावी की स्थापना उनके प्रमुख प्रयासों में शामिल है।
दोनों व्यक्तित्वों का पद्मश्री के लिए चयन ग्रामीण विकास, शिक्षा और सहकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।


