महाराष्ट्र में किसानों के खराब ऋण (एनपीए) में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्टेट लेवल बैंकर्स कमिटी (SLBC) के अनुसार जून 2025 तक किसानों के बकाया या खराब ऋण 16.3% बढ़कर 35,477 करोड़ रुपये तक पहुँच गया हैं।
यह बढ़ोतरी उस समय हुई है जब राज्य की सत्तारूढ़ सरकार ने चुनाव से पहले किसानों के लिए कर्जमाफी का वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार अब कृषि क्षेत्र के कुल ऋण 2.78 लाख करोड़ रुपये में से 12.75% एनपीए बन चुके हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर सबसे अधिक बकाया 20,303 करोड़ रुपये है। जबकि सहकारी बैंकों पर 9,527 करोड़ रुपये का बकाया है।
इसके अलावा तनावग्रस्त खातों (stressed accounts) की संख्या में भी 60% की वृद्धि हुई है और ये अब 24.7 लाख तक पहुँच गए हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि किसानों में कर्जमाफी की उम्मीद और विदर्भ व मराठवाड़ा जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ती आर्थिक तंगी के कारण डिफॉल्ट दर में तेज वृद्धि हुई है।


