आमतौर पर अक्टूबर का महीना ठंडी हवाओं की दस्तक लेकर आता है, लेकिन इस बार बरसते मेघा ने पूरे उत्तर भारत को बेहाल कर दिया है। दिल्ली की सड़कों पर बारिश का ऐसा जलजला आया है कि शहर मानो तालाब बन गया हो। मंगलवार को जगह-जगह ट्रैफिक जाम, जलभराव ने राजधानी की तस्वीर को अस्त-व्यस्त कर दिया।
हिमाचल में भयावह भूस्खलन -15 की मौत, एक बच्चा लापता
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया। बिलासपुर जिले के घुमारवीं रूट पर सोमवार शाम को संतोषी नाम की निजी बस अचानक पहाड़ टूटने की चपेट में आ गई। देखते ही देखते मलबा और पत्थर बस पर आ गिरे। पुलिस और स्थानीय प्रशासन तुरंत राहत कार्य में जुट गया, लेकिन अंधेरा और भारी मलबा बचाव में बड़ी बाधा बन गया।
एसपी संदीप धंवल ने पुष्टि की कि हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, इनमें 9 पुरुष, 4 महिलाएँ और 2 बच्चे शामिल हैं। डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि हादसे के बाद एक बच्चा अभी भी लापता है।
बिहार में बाढ़ का संकट – 21 नदियाँ उफनाईं, 15 साल बाद ऐसा नजारा
उधर बिहार में मानो आसमान और धरती दोनों ने मिलकर मुसीबत बरसा दी है। नेपाल और आसपास के इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण राज्य की 21 नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कोसी, बागमती, गंडक, कमला, बलान, अधवारा, ललबकिया, परमान, महानंदा, पुनपुन, लखनदेई, माही, बाया, गंडकी, कर्मनाशा, दुर्गावती, मोहाने, पश्चिम कनकई, बनास, थोमाने, भूतही और घोघा जैसी प्रमुख नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, खगड़िया और पश्चिम चंपारण जैसे जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पिछले 15 वर्षों में यह पहला मौका है जब अक्टूबर के महीने में इतनी बड़ी संख्या में नदियाँ उफनाई हों।


