नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ (National Federation of Cooperative Sugar Factories) ने मंगलवार को देश भर की सहकारी चीनी मिलों की दीर्घकालिक सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण वर्चुअल ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र का आयोजन किया। यह सत्र केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah द्वारा सहकारी क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और विस्तार को लेकर जारी निर्देशों के अनुपालन में आयोजित किया गया।
इस उच्चस्तरीय सत्र में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नीति विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े प्रमुख स्टेकहोल्डर्स ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य फोकस सहकारी विकास के राष्ट्रीय एजेंडा के अनुरूप सहकारी चीनी मिलों के संचालन को मजबूत करने, उनकी वित्तीय और परिचालन क्षमता बढ़ाने तथा एथेनॉल, को-जनरेशन, बायो-एनर्जी जैसे क्षेत्रों में विविधीकरण की संभावनाओं पर केंद्रित रहा।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) अश्विनी श्रीवास्तव ने मंत्री के निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी और सभी स्टेकहोल्डर्स से व्यावहारिक एवं क्रियान्वयन योग्य सुझाव साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहकारी चीनी मिलों की स्थिरता केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर मूल्य संवर्धन और आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने से ही सुनिश्चित की जा सकती है।
NFCSF के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनवरे ने बताया कि इस सत्र में प्राप्त सुझावों और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर सहकारी चीनी मिलों के विस्तार और विविधीकरण को लेकर एक समग्र रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिसे आगे नीति स्तर पर साझा किया जाएगा।
ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र में National Cooperative Development Corporation (NCDC) के डायरेक्टर वी. के. डुबासी, कृषि मंत्रालय, Deloitte, तथा Council on Energy, Environment and Water (CEEW) के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की सहकारी चीनी मिलों के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शामिल हुए।


