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दक्षता घटी, पहुंच बढ़ी: ऑफ-ग्रिड सौर नीति में बदलाव से ग्रामीण भारत को नई रोशनी, स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

भारत सरकार ने ऑफ-ग्रिड सौर मॉड्यूल की न्यूनतम दक्षता 19% से घटाकर 18% की है, जिससे सस्ते सौर उपकरण ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचेंगे। यह नीति बच्चों की शिक्षा, महिलाओं की सुरक्षा, और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देगी, साथ ही स्थानीय विनिर्माण और रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा।

Published: 12:16pm, 15 May 2025

भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने ऑफ-ग्रिड सौर परियोजनाओं को और अधिक सुलभ व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया है। मंत्रालय ने सौर मॉड्यूल की अनुमोदित सूची (ALMM) के अंतर्गत न्यूनतम दक्षता स्तर को 19 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इस निर्णय से अब 200 वॉट पीक से कम क्षमता वाले सस्ते सौर मॉड्यूल भी इस सूची में शामिल किए जा सकेंगे।

यह परिवर्तन विशेष रूप से उन दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा, जहां अब भी बिजली की आपूर्ति सीमित है। कम लागत में उपलब्ध होने वाले सौर उपकरण जैसे स्ट्रीट लाइट, सोलर पंखे और लैंप अब अधिक गांवों तक पहुंच सकेंगे। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई को सुविधा मिलेगी, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और स्थानीय उद्यमिता को भी बल मिलेगा।

नीति संशोधन का एक अन्य सकारात्मक पहलू यह है कि इससे लघु और मध्यम सौर मॉड्यूल निर्माताओं को ALMM में स्थान मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे स्थानीय स्तर पर निर्माण और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सौर उपकरणों की कीमतों में गिरावट और आपूर्ति में स्थिरता की संभावना भी प्रबल हो गई है।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 तक देश में लाखों ऑफ-ग्रिड सौर लाइट्स और स्ट्रीट लाइट्स की स्थापना की जा चुकी है। अप्रैल 2025 तक भारत की कुल सौर ऊर्जा क्षमता 107.95 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है, जिसमें से 4.98 गीगावॉट क्षमता ऑफ-ग्रिड समाधानों से है। ऐसे में यह नीति बदलाव ग्रामीण भारत के लिए ऊर्जा की एक नई किरण बनकर उभरने की संभावना रखता है।

ऑफ-ग्रिड सौर परियोजनाएं उन भारतीय गांवों के लिए उम्मीद की रोशनी हैं, जहां अब तक पारंपरिक ग्रिड बिजली नहीं पहुंच पाई है। सरकार की नई नीति के तहत इन क्षेत्रों तक सस्ती और सुलभ सौर ऊर्जा पहुंचने का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे विद्यार्थियों को पढ़ाई में मदद मिलेगी, महिलाओं को सुरक्षा का एहसास होगा और स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा।

MNRE का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा सुलभता को मजबूती प्रदान कर सकता है। हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी तंत्र को सख्त बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होगा। यदि दक्षता और विश्वसनीयता के बीच संतुलन बना रहा, तो यह पहल छोटे सौर उपकरणों के जरिए ग्रामीण विकास की एक नई कहानी गढ़ सकती है।

YuvaSahakar Desk

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