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‘माइनर कार्प’ और ‘कैट फिश’ से आत्मनिर्भर होंगे बिहार के मछली पालक, जानिए सरकार की योजना

बिहार सरकार ने मत्स्य पालकों की आमदनी बढ़ाने और मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से "मत्स्य प्रजाति का विविधिकरण योजना" शुरू की है। इस योजना के तहत माइनर कार्प और कैट फिश के हैचरी व पालन पर अनुदान प्रदान किया जा रहा है। आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन है और अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की गई है।

Published: 09:00am, 06 Jul 2025

बिहार सरकार द्वारा राज्य के मत्स्य क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से “मत्स्य प्रजाति का विविधिकरण योजना” की शुरुआत की गई है। इस योजना का संचालन पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निदेशालय द्वारा किया जा रहा है।

इस योजना के माध्यम से राज्य में देशी प्रजातियों की मछलियों विशेष रूप से माइनर कार्प एवं कैट फिश के हैचरी निर्माण और पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य जल संसाधनों में मौजूद देशी प्रजातियों के संरक्षण, संवर्द्धन एवं उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, जिससे मत्स्य उत्पादकता के साथ किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

योजना के अंतर्गत चार श्रेणियों में सब्सिडी प्रदान की जा रही है –

  1. माइनर कार्प हैचरी: इकाई लागत ₹13.12 लाख (इनपुट सहित)

  2. कैट फिश हैचरी: इकाई लागत ₹15.37 लाख

  3. माइनर कार्प पालन मात्स्यिकी: ₹0.94 लाख प्रति इकाई

  4. कैट फिश पालन मात्स्यिकी: ₹1.35 लाख प्रति इकाई

सरकार इन योजनाओं पर 60 प्रतिशत तक की अनुदान राशि प्रदान कर रही है। शेष 40% राशि लाभार्थी स्वयं अथवा बैंक ऋण के माध्यम से वहन कर सकते हैं।

योजना का लाभ राज्य के सभी जिलों के पात्र किसानों को मिलेगा। योजना में आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और इच्छुक आवेदक fisheries.bihar.gov.in पर 31 अगस्त 2025 तक आवेदन कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए state.bihar.gov.in/ahd वेबसाइट या संबंधित जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

प्रत्येक आवेदक को हैचरी अथवा पालन में से केवल एक विकल्प के लिए अनुमोदन मिलेगा और उसे कम से कम 0.25 एकड़ एवं अधिकतम 1 एकड़ जलक्षेत्र की आवश्यकता होगी।

YuvaSahakar Desk

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