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युवाओं की ज्यादा भागीदारी से सहकारिता में बढ़ेगा नवाचार

अभी सहकारिता क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी मात्र 10 प्रतिशत है जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की जरूरत है। तभी सहकारिता आंदोलन में नई ऊर्जा, नवाचार और स्थायी विकास संभव हो पाएगा। नेतृत्व स्तर पर तो युवाओं की भागीदारी नाममात्र है। कोऑपरेटिव सोसायटीज के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स सहित अन्य पदों के लिए होने वाले चुनाव में युवाओं के लिए सीट आरक्षित कर और चुनाव लड़ने वाले प्रतिनिधियों के लिए उम्र सीमा तय कर युवाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।

Published: 10:00am, 27 Dec 2025

सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से जिस तरह से सहकारिता क्षेत्र में व्यापक बदलाव का दौर शुरू हुआ है, उससे इस क्षेत्र में युवाओं के लिए नए-नए अवसर पैदा हो रहे हैं। भारत की बड़ी युवा आबादी के लिए इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। इन्हीं संभावनाओं में से एक है कोऑपरेटिव बैंकिंग और फाइनेंस का सेक्टर। देश में इस समय हजारों कोऑपरेटिव बैंक और क्रेडिट सोसायटी हैं जिनका विस्तार ग्रामीण स्तर से लेकर बड़े शहरों तक है। कोऑपरेटिव बैंकिंग एवं फाइनेंस सेक्टर का अगर संयुक्त रूप से आकलन किया जाए तो यह निजी बैंकिंग क्षेत्र के मुकाबले काफी बड़ा है और इसका विस्तार भी ज्यादा है, लेकिन तकनीक और आधुनिकीकरण के अभाव में निजी बैंकिंग क्षेत्र की तुलना में इसका प्रभाव और ग्राहक आधार कम है। 

कोऑपरेटिव बैंकों और क्रेडिट सोसायटियों को भी अब आधुनिक बनाया जा रहा है, उन्हें तकनीकी तौर पर मजबूत और उनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है। 10 और 11 नवंबर को नई दिल्ली में शहरी सहकारी ऋण क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को-ऑप कुंभ 2025 का आयोजन अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के अंब्रेला संगठन नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसायटीज लिमिटेड (नैफकब) ने किया। देश और विदेश के सहकारिता से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया जिसका उद्घाटन केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया। इस सम्मेलन का थीम ‘डिजिटलाइजिंग ड्रिम्स- सशक्त समुदाय’ रखा गया था। को-ऑप कुंभ 2025 के दौरान पॉलिसी, तकनीक और इनोवेशन के विषय पर इस क्षेत्र से जुड़ी कई संभावनाओं का दोहन करने लिए विचार किया गया। साथ ही अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के विस्तार का रोडमैप तैयार करने के लिए ‘दिल्ली घोषणा 2025’ को प्रस्तुत किया गया। 

युवाओं की भूमिका, नेतृत्व और नवाचार पर केंद्रित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन “सहकारिता में युवा: भावी नेतृत्व और नवाचार” सत्र को एनवाईसीएस के प्रतिनिधि के तौर पर मैंने भी संबोधित किया। युवाओं की कोऑपरेटिव नेशनल युवा कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड (एनवाईसीएस) भी अपने जननिधि प्लेटफॉर्म के तहत क्रेडिट सोसायटी का ही काम करती है। इसके माध्यम से युवा उद्यमों को वित्तीय मदद मुहैया कराई जाती है। साथ ही युवाओं का कौशल विकास कर उन्हें उद्यमी बनने और स्व-रोजगार के लिए प्रेरित किया जाता है। इस सत्र में वक्ता के रूप में मेरे अलावा मुख्य रूप से सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार और सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रवींद्र कुमार अग्रवाल, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और नीति आयोग में संयुक्त सचिव कमल कुमार त्रिपाठी मौजूद थे। 

भारत में सहकारिता आंदोलन अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां युवा केवल सदस्य नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता, निर्णयकर्ता और नवप्रवर्तक बनकर उभर रहे हैं। सहकारिता केवल सहयोग नहीं, बल्कि विश्वास, पारदर्शिता और साझेदारी की संस्कृति है। सहकारी संस्थाएं लोगों को स्व-रोजगार और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं। इससे व्यक्ति और समुदाय दोनों आत्मनिर्भर बनते हैं। एनवाईसीएस युवाओं की ऊर्जा, विचारों और नेतृत्व क्षमता को एक संरचित दिशा देने के लिए लगातार काम कर रही है। संगठन का मुख्य उद्देश्य सहकारिता को आधुनिक दृष्टिकोण और युवाओं की पहल के साथ जोड़ना है। सहकारिता भारतीय आर्थिक विकास का एक मजबूत स्तंभ है, लेकिन भविष्य में इसे और सशक्त बनाने के लिए युवा दृष्टि, तकनीक, नवाचार और नेतृत्व अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए इन बिंदुओं पर काम करने की जरूरत हैः

डिजिटल सहकारिता: डिजिटल दुनिया के इस दौर में सहकारी संस्थाओं के डिजिटलाइजेशन के बिना युवाओं को इनसे जोड़ना मुश्किल है क्योंकि आज प्रत्येक युवा के हाथ में मोबाइल फोन है और वे कागजी दुनिया की बजाय डिजिटल माध्यम पर ज्यादा निर्भर हैं। ऐसे में सहकारी संस्थाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म, फिनटेक, डेटा प्रबंधन एवं तकनीक का उपयोग कर और डिजिटल सहकारिता के माध्यम से खुद को आधुनिक बनाने की जरूरत है। इस कड़ी में नैफकब ने कोऑपरेटिव सेक्टर में पहली बार पेमेंट और लोन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म डिजीपे ऐप और डिजी लोन ऐप लॉन्च किया है। इसके माध्यम से कोऑपरेटिव संस्थाओं और उनके सदस्यों को डिजिटली पेमेंट करने और बिना कागजी कार्रवाई के लोन लेने में मदद तो मिलेगी ही, युवाओं के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे। इस ऐप से सिर्फ शहरी ही नहीं, दूरदराज के छोटे कोऑपरेटिव बैंकों और उनके ग्राहकों को भी सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। 

कौशल विकास एवं उद्यमिता कार्यक्रम: सहकारी संस्थाएं लोगों को स्व-रोजगार और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं। इससे व्यक्ति और समुदाय दोनों आत्मनिर्भर बनते हैं। सहकारिता के माध्यम से युवाओं का कौशल विकास कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पहल जरूरी है। इससे युवाओं में सहकार की भावना तो मजबूत होगी ही, वे इस क्षेत्र की ओर आकर्षित भी होंगे।

स्टार्टअप-कोऑपरेटिव मॉडल: नवाचार आधारित सहकारी व्यवसायों को प्रोत्साहन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। कोऑपरेटिव बैंकों और क्रेडिट सोसायटी को ऐसे व्यवसायों के लिए अलग से स्कीम लाकर उन्हें समर्थन देने की जरूरत है।

सामुदायिक नेतृत्व और युवा भागीदारी: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सामाजिक विकास की दिशा तय करने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सहकारिता का मूल सिद्धांत यही है कि जब लोग मिलकर सोचते और कार्य करते हैं, तो परिणाम अधिक प्रभावी, संतुलित और टिकाऊ होते हैं। अकेले किए गए प्रयास सीमित रह जाते हैं, जबकि सामूहिक नेतृत्व और संयुक्त प्रयास से विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और दृष्टि सहकारिता आंदोलन में नई शक्ति का संचार करती है, जिससे समुदाय का सर्वांगीण विकास संभव होता है। अभी सहकारिता क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी मात्र 10 प्रतिशत है जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की जरूरत है। तभी सहकारिता आंदोलन में नई ऊर्जा, नवाचार और स्थायी विकास संभव हो पाएगा। नेतृत्व स्तर पर तो युवाओं की भागीदारी नाममात्र है। कोऑपरेटिव सोसायटीज के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स सहित अन्य पदों के लिए होने वाले चुनाव में युवाओं के लिए सीट आरक्षित कर और चुनाव लड़ने वाले प्रतिनिधियों के लिए उम्र सीमा तय कर युवाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। यह समय की मांग भी है और जरूरत भी।

युवाओं की सहकारी समितियों को वित्तीय सहयोग: सहकारिता आंदोलन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए युवाओं की सहकारी समितियों का गठन ज्यादा से ज्यादा किए जाने की जरूरत है। साथ ही कम ब्याज दर वाले ऋण, अनुदान कार्यक्रम और निवेश के माध्यम से युवाओं की सहकारी पहल को मजबूत आधार प्रदान किया जा सकता है।

को-ऑप कुंभ जैसे मंच न केवल विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करते हैं, बल्कि यह युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व करने का अवसर भी देते हैं। भारत का युवा सहकारी क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए तैयार है, जरूरत है उन्हें उचित समर्थन और प्रोत्साहन की।

लेखक: अभिषेक कुमार, महाप्रबंधक, एनवाईसीएस

YuvaSahakar Desk

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