अम्मान में मंगलवार को भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) के चेयरमैन दिलीप संघाणी ने जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। यह बैठक भारत और जॉर्डन के बीच खाद और कृषि क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बैठक के दौरान संघाणी ने कहा कि, “यह मुलाकात भारत–जॉर्डन के बीच खाद क्षेत्र में सहयोग को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।” उन्होंने IFFCO की ओर से उत्पादन, तकनीक और सतत विकास के क्षेत्रों में गहन सहयोग के लिए तत्परता व्यक्त की।
वहीं जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन ने कहा कि, “कृषि और उर्वरक क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।”
बैठक में खाद उद्योग के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, आधुनिक उत्पादन तकनीकों को अपनाने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और सतत खेती को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
IFFCO और जॉर्डन फॉस्फेट माइंस कंपनी (JPMC) के बीच पहले से चल रहे संयुक्त उपक्रम जॉर्डन–इंडिया फर्टिलाइजर कंपनी (JIFCO) को दोनों देशों के मजबूत रिश्तों की नींव बताया गया।
IFFCO ने जॉर्डन सरकार का निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि JIFCO के माध्यम से संयुक्त प्रयास जल्द ही उर्वरक उत्पादन में वृद्धि और दोनों देशों के किसानों को प्रत्यक्ष लाभ दिलाएंगे।
बैठक में JIFCO के चेयरमैन मोहम्मद के. थनीबात, IFFCO के मैनेजिंग डायरेक्टर के. जे. पटेल, डिप्टी एमडी राकेश कपूर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिससे इस पहल की उच्चस्तरीय गंभीरता झलकती है।
यह नई साझेदारी पहले से हुए समझौतों पर आधारित है – JPMC और IFFCO ने बड़े पैमाने पर फॉस्फेट आपूर्ति समझौते किए हैं, जिनमें भारत की जॉर्डन से आयात लक्ष्य को 3 मिलियन टन प्रति वर्ष तक बढ़ाने की योजना शामिल है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात दोनों सरकारों की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें कृषि-इनपुट सुरक्षा सुनिश्चित करना, उर्वरक कच्चे माल के बाजार में अस्थिरता कम करना और दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा लक्ष्यों को एकसाथ आगे बढ़ाना शामिल है।
आगे चलकर दोनों पक्ष इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, उर्वरक तकनीक में संयुक्त अनुसंधान, नए उर्वरक संयंत्रों के निर्माण और किसान जागरूकता कार्यक्रमों के लिए रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम करेंगे।
IFFCO और उसके किसान सदस्यों के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की आपूर्ति सुनिश्चित करने, वैश्विक आपूर्ति शृंखला से बेहतर एकीकरण और निर्यात-उन्मुख उत्पादन के नए अवसरों के द्वार खोलेगी। वहीं, जॉर्डन के लिए यह साझेदारी फॉस्फेट उद्योग में मूल्यवर्धन, औद्योगिक क्षमता में वृद्धि और भारत जैसे विशाल कृषि बाजार से मजबूत व्यापारिक संबंधों का अवसर लेकर आई है।


