गोवा के एनआईओ ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “गोवा में डेयरी विकास – अवसर और चुनौतियाँ” में देश के प्रमुख डेयरी संगठनों ने हिस्सा लिया। इस संगोष्ठी का आयोजन इंडियन डेयरी एसोसिएशन (पश्चिम क्षेत्र) द्वारा, पशुपालन विभाग, सहकार विभाग, गोवा सरकार, गोवा राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (गोवा डेयरी) और सूरत जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (सुमुल डेयरी, गुजरात) के सहयोग से किया गया।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की ओर से डॉ. निलेश नायी, डॉ. निहार रंजन घोष और सुश्री सिंजिनी गुहा ने भाग लिया और तकनीकी सत्रों में अपने विचार साझा किए। उन्होंने पशु स्वास्थ्य, दूध उत्पादकता, सरकारी नीतियाँ, स्मार्ट डेयरी फार्मिंग, फीड और चारा प्रबंधन तथा सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण प्रस्तुतियाँ दीं।
इस अवसर पर सुमुल डेयरी के प्रबंध निदेशक सी.ए. अरुण पुरोहित ने कहा कि सुमुल डेयरी गोवा के डेयरी सेक्टर के सतत और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सुमुल का लक्ष्य स्थानीय किसानों को प्रशिक्षण, नस्ल सुधार, चारा प्रबंधन और मूल्य संवर्धन के माध्यम से सशक्त बनाना है।
पुरोहित ने कहा कि सुमुल के फील्ड-स्तर के प्रयासों ने छोटे डेयरी किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है, जिससे उन्हें न्यायसंगत मूल्य और ग्रामीण समृद्धि प्राप्त हुई है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि डेयरी क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता निर्माण, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और जलवायु-संवेदनशील डेयरी प्रथाओं को बढ़ावा देना होगा।
उन्होंने कहा, “सस्टेनेबिलिटी और आत्मनिर्भरता को नवाचार के साथ जोड़ना ही डेयरी विकास का भविष्य है।”
संगोष्ठी में विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और सहकारी नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि सहकारी मॉडल भारत की डेयरी सफलता की रीढ़ है। सुमुल डेयरी ने यह भरोसा दिलाया कि वह गोवा डेयरी और गोवा सरकार के साथ मिलकर काम करती रहेगी, ताकि गोवा को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया जा सके और यह राज्य क्षेत्रीय डेयरी सहयोग का आदर्श मॉडल बन सके।


