नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (NCUI) ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित NCUI बोर्ड रूम में हाइब्रिड मोड में आयोजित उच्च-स्तरीय सेमिनार के साथ 72वां अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह सफलतापूर्वक संपन्न किया।
इस वर्ष समापन कार्यक्रम का विषय था- “वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सहकारी व्यावसायिक मॉडलों में नवाचार”, जिसने देश के सहकारी भविष्य पर दूरदर्शी चर्चा का मार्ग प्रशस्त किया।
NCUI के अध्यक्ष दिलिप संघाणी वर्चुअल रूप से कार्यक्रम से जुड़े, हालांकि तकनीकी कारणों से वे अपन उद्बोधन नहीं दे सके। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. के.के. त्रिपाठी, संयुक्त सचिव (EAC–PM), NCUI सीईओ सुधीर महाजन, उप मुख्य कार्यकारी सवित्री सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। संचालन वेद सेतिया ने किया।
डॉ. त्रिपाठी का मुख्य वक्तव्य
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि भारत का सहकारी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहाँ नवाचार, तकनीक अपनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सहकारिता अपनी मूल्यों में गहरी जड़ें रखती है, लेकिन तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में आधुनिक प्रणालियाँ और डिजिटल तैयारी अनिवार्य हैं।
उन्होंने कहा, “आज की तेजी से बदलती दुनिया में स्थिर रहना ही पीछे छूटने का सबसे तेज तरीका है।”
उन्होंने बताया कि भारत के पास दुनिया की सबसे मजबूत सहकारी विरासतों में से एक है, लेकिन शासन से संबंधित कमियों के कारण दीर्घकालिक प्रदर्शन अक्सर प्रभावित होता है। अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अच्छा गवर्नेंस सीधे प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है, इसलिए संरचनात्मक सुधार, एकरूप कानून और मजबूत संस्थागत ढांचे अत्यंत आवश्यक हैं।
डॉ. त्रिपाठी ने कानूनी, नियामकीय, प्रबंधकीय और चुनावी ढाँचों सहित मूलभूत प्रणालियों के पुनःडिजाइन की आवश्यकता बताई। उन्होंने पारदर्शी ऑडिट, पेशेवर मानव संसाधन प्रणाली, निगरानी की स्पष्टता और सहकारी संस्थाओं के लिए व्यापार सुगमता में सुधार पर जोर दिया।
उन्होंने सहकारिताओं से एआई आधारित सलाहकारी उपकरण, ब्लॉकचेन ट्रैसेबिलिटी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा एनालिटिक्स अपनाने का आह्वान किया। साथ ही युवाओं की नेतृत्व भूमिका, उत्पाद विविधीकरण और विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों व स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी को भी जरूरी बताया।
भारत की जनसंख्या शक्ति और डिजिटल अवसंरचना को देखते हुए उन्होंने कहा कि देश में “सहकारी पुनर्जागरण” की पूरी क्षमता मौजूद है। उन्होंने सहकारिताओं से मोंड्रागॉन, फोंटेरा और राबोबैंक जैसे वैश्विक नेताओं से सीख लेने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “भारत मानता है कि सहकारिता वैश्विक सहयोग को नई ऊर्जा दे सकती है।”
अपने संबोधन का समापन करते हुए उन्होंने कहा, “यदि दूर तक जाना है, तो साथ चलें” और सहकारिताओं से विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरूप पुन:डिजाइन, पुन:आविष्कार और उन्नति का आह्वान किया।
एनसीयूआई सीईओ का संबोधन
स्वागत भाषण में एनसीयूआई के सीईओ ने कहा कि सप्ताहभर चली चर्चाओं ने बहुमूल्य सुझाव दिए हैं जिन्हें संबंधित मंत्रालयों को भेजने हेतु दस्तावेजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते परिवेश में सहकारी नवाचार अनिवार्य होते जा रहे हैं और सहकारिताओं को इस परिवर्तन में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए।
उन्होंने मंत्रालय के कई महत्वपूर्ण प्रयासों और इंटरनेशनल ईयर ऑफ कोऑपरेटिव्स की तैयारियों का उल्लेख किया। अमूल के वैश्विक मॉडल, एनडीडीबी की डेयरी साझेदारियाँ, बनास डेयरी का सुजुकी के साथ एमओयू, तथा एएमआर डेयरी में तकनीकी प्रगति जैसे उदाहरण साझा किए।
इसके साथ ही उन्होंने भारत टैक्सी जैसे नए सहकारी उद्यमों जो ओला और उबर को चुनौती दे रहा है तथा NUCFDC के सहकार डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म को भारत में तेजी से विकसित हो रहे सहकारी इकोसिस्टम का प्रमाण बताया।
उप मुख्य कार्यकारी सवित्री सिंह ने देशभर की सहकारी संस्थाओं की व्यापक सहभागिता के लिए आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।


