राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), जो सहकारिता मंत्रालय के तहत काम करने वाली देश की शीर्ष वित्तीय संस्था है, ने वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक का सबसे बेहतर वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है।
इस साल एनसीडीसी ने कुल 1,30,377.60 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की और 95,175.71 करोड़ रुपये की राशि वितरित की, जिससे देशभर में कृषि, डेयरी, मत्स्य, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग, आवास और सेवा क्षेत्र की सहकारी संस्थाओं को सीधा लाभ मिला।
इस मदद से 2,76,760 सहकारी समितियों और 1.27 करोड़ सदस्यों को फायदा पहुंचा। यह सहयोग महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु समेत 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैला हुआ है।
एनसीडीसी का मॉडल राज्य फेडरेशनों, जिला स्तर की समितियों और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के साथ मिलकर काम करने पर आधारित है, जिससे जमीनी स्तर पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हुआ है।
वित्तीय मजबूती एनसीडीसी की सबसे बड़ी ताकत रही है। 1963 में स्थापना के बाद से एनसीडीसी लगातार लाभ में रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भी इस परंपरा को बरकरार रखते हुए निगम ने 99.75% की रिकवरी दर और शून्य एनपीए दर्ज किया। इस साल इसका शुद्ध लाभ लगभग 750 करोड़ रुपये रहा, जिससे यह देश की सबसे कुशल सार्वजनिक वित्तीय संस्थाओं में शामिल हो गया है।
मार्च 2025 तक एनसीडीसी की कुल वितरित राशि 4,08,376.68 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। पिछले 10 वर्षों में इसकी विकास दर प्रभावशाली रही है — 2015-16 में 7,118 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 95,175.71 करोड़ रुपये, यानी लगभग 33% की वार्षिक वृद्धि दर।
एनसीडीसी ने कई सरकारी योजनाओं के साथ मिलकर काम किया है, जिनमें 10,000 किसान उत्पादक संगठन (FPOs) बनाना, PACS का कंप्यूटरीकरण, महिला और जनजातीय सहकारिताओं को बढ़ावा देना, और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य क्षेत्र को ऋण सहायता देना शामिल है।
आने वाले साल के लिए एनसीडीसी ने 80,000 करोड़ रुपये के नए वितरण लक्ष्य का ऐलान किया है। अब निगम का ध्यान गुणवत्तापूर्ण ऋण, स्थिरता, डिजिटल निगरानी और सहकारी संस्थाओं की क्षमता निर्माण पर होगा। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, एग्री-लॉजिस्टिक्स और जलवायु अनुकूल ढांचे में निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार के “सहकार से समृद्धि” के विजन के साथ, एनसीडीसी आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य, पर्यटन, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में सहकारिता के विस्तार में अहम भूमिका निभाने जा रहा है।


