भारत के कृषि क्षेत्र में गेहूं एक प्रमुख फसल के रूप में अपनी केंद्रीय भूमिका निभा रहा है, और इसके उद्योग के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन चंडीगढ़ में किया जा रहा है। व्हीट प्रोडक्ट्स प्रमोशन सोसाइटी (WPPS) तथा रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन ऑफ पंजाब (RFMAP) के संयुक्त तत्वावधान में ‘Wheat in Transformation: Preparing for Climate, Quality and Consumption’ शीर्षक वाली यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 7 तथा 8 नवंबर 2025 को हयात रीजेंसी, चंडीगढ़ में आयोजित होगी।
इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, गुणवत्ता सुधार और उपभोक्ता मांगों के अनुरूप गेहूं उद्योग को भविष्य के लिए तैयार करना है। इस अवसर पर देशभर के किसान, गेहूं प्रजनक, मिलर्स, बेकर्स, फूड प्रोसेसर, जलवायु वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्रित होंगे।
WPPS के चेयरमैन अजय गोयल ने कहा कि यह सम्मेलन गेहूं उद्योग के सभी सदस्यों के लिए नवाचार और अनुसंधान का एक साझा मंच बनेगा। “हमारा उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और गुणवत्ता सुधार की चुनौतियों का समाधान खोजते हुए उद्योग को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
तकनीकी सत्रों में AI से लेकर क्लाइमेट रेजिलिएंस तक चर्चा
सम्मेलन के दौरान पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें गेहूं उद्योग से जुड़े विभिन्न आयामों पर चर्चा होगी, जैसे:
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मिलिंग, बेकिंग और प्रोसेसिंग तकनीक (AI आधारित नवाचारों सहित)
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गेहूं उत्पादन में सुधार और जलवायु-लचीली किस्मों का विकास
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उद्योग की जरूरतें और नवीन सामग्री (Innovative Ingredients)
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फसल कटाई के बाद प्रबंधन, भंडारण और गुणवत्ता सुनिश्चितता (Post-Harvest Management & Quality Assurance)
सम्मेलन में ITC लिमिटेड, नेस्ले, ग्रुपो बिम्बो, लुइस ड्रेफस कंपनी, मेगास्टार फूड्स, CSIR–CFTRI, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PAU) लुधियाना और Skymet Weather Services जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। ये विशेषज्ञ तकनीकी नवाचार, स्थिरता (Sustainability) और क्लाइमेट रेजिलिएंस पर अपने विचार साझा करेंगे।
RFMAP के अध्यक्ष अजय जिंदल ने कहा कि इस आयोजन का चंडीगढ़ में होना इस तथ्य का प्रतीक है कि पंजाब भारत के गेहूं और खाद्य उद्योग के भविष्य को दिशा देने में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन विज्ञान और उद्योग के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने का कार्य करेगा।


