राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर आनंद स्थित NDDB मुख्यालय में देशभर के दुग्ध उत्पादकों और सहकारी संगठनों ने मिलकर ‘मिल्क मैन ऑफ इंडिया’ डॉ. वर्गीज़ कुरियन की जयंती मनाई। इस कार्यक्रम में NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने डॉ. कुरियन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।
डॉ. शाह ने कहा कि डॉ. कुरियन सिर्फ NDDB के संस्थापक नहीं थे, बल्कि उन्होंने अमूल और GCMMF जैसे संस्थानों को खड़ा कर भारत में दुनिया की सबसे सफल डेयरी सहकारी मॉडल की नींव रखी। उनके नेतृत्व में बना ‘आनंद पैटर्न’ आज भी लाखों किसानों की जिंदगी बदल रहा है और इसे देश का सबसे सफल सहकारी ढांचा माना जाता है।
उन्होंने बताया कि डॉ. कुरियन का लक्ष्य केवल दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं था, बल्कि ग्रामीण भारत का सामाजिक और आर्थिक विकास था। दूध को उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें बाजार से जोड़ने और समान अवसर देने का माध्यम बनाया।
डॉ. शाह ने व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस चरण में 75,000 नए गांवों तक डेयरी सहकारी संस्थाएं पहुँचाई जाएंगी, खासकर उन इलाकों में जहाँ अब तक डेयरी विकास कम हुआ है। इससे किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा और अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार इस आंदोलन से जुड़ सकेंगे।
भारत में दूध उत्पादन सालाना 6% से अधिक की दर से बढ़ रहा है। डॉ. शाह ने विश्वास जताया कि वर्तमान 6.5 करोड़ लीटर प्रतिदिन की दुग्ध संग्रह क्षमता अगले 3–4 वर्षों में 10 करोड़ लीटर प्रतिदिन तक पहुँच जाएगी।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि डॉ. कुरियन की शुरुआत की गई इस दुग्ध क्रांति से जुड़कर ही हम उनके सपने को साकार कर सकते हैं और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ सकते हैं—साथ ही हर किसान के चेहरे पर मुस्कान सुनिश्चित कर सकते हैं।


