भारत में ग्रामीण सहकारी बैंकिंग (Cooperative Bank) के दायरे को और व्यापक बनाने की निर्णायक पहल के तहत नाबार्ड (NABARD) ने एक दृष्टिपत्र जारी किया है। इसमें देशभर के पिछड़े और वंचित क्षेत्रों में 240 नए जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCBs) और दो राज्य सहकारी बैंक (StCBs) स्थापित करने की सिफारिश की गई है।
सहकारिता मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को राज्य सरकारों के पास उनकी प्रतिक्रिया और कार्यवाही के लिए भेज दिया है। यह कदम वित्तीय समावेशन को मजबूत करने की दिशा में लगातार बढ़ते प्रयासों का संकेत है।
दृष्टिपत्र में बताया गया है कि वर्तमान में देश के 615 जिलों में से 573 जिलों में 351 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक सक्रिय हैं, जबकि 42 जिलों में इनकी कमी है। इनमें से 38 जिलों में राज्य सहकारी बैंकों की शाखाएं तो हैं लेकिन समर्पित DCCB नहीं हैं। वहीं झारखंड के तीन और उत्तर प्रदेश के एक जिले में न तो DCCB हैं और न ही StCB शाखाएं।
इसके अलावा, दो केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख और लक्षद्वीप पूरी तरह सहकारी बैंकिंग ढांचे से वंचित हैं। दृष्टिपत्र में इन दोनों केंद्रशासित प्रदेशों में राज्य सहकारी बैंक स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि वहां दो-स्तरीय सहकारी बैंकिंग प्रणाली विकसित हो सके।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दृष्टिपत्र में नए बैंकों की स्थापना से जुड़े वैधानिक और विनियामक दिशानिर्देश भी समाहित किए गए हैं, जिससे राज्य सरकारें नियामकीय अपेक्षाओं के अनुरूप ढांचे का विस्तार कर सकें।
इस बीच ठोस प्रगति का संकेत भी मिला है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने तमिलनाडु में सलेम DCCB का विभाजन मंजूर कर दिया है, जिसके तहत नमक्कल जिले के लिए अलग जिला केंद्रीय सहकारी बैंक बनाया जाएगा। यह प्रस्तावित व्यापक ढांचे के अनुरूप क्षेत्र-विशिष्ट पुनर्गठन का उदाहरण है।
फिलहाल देश में 34 राज्य सहकारी बैंक और 351 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक नाबार्ड व आरबीआई के पर्यवेक्षण में कार्यरत हैं। ऐसे में 240 नए DCCBs की स्थापना इस नेटवर्क को लगभग 70% तक बढ़ा देगी।
इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत के “वित्तीय मरुस्थलों” को समाप्त करना है। सहकारी बैंक लंबे समय से कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए जमीनी स्तर पर ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। लेकिन भौगोलिक असमानताओं के कारण कई क्षेत्रों में यह सुविधा समान रूप से उपलब्ध नहीं हो सकी।
हर जिले में समर्पित DCCB और लद्दाख व लक्षद्वीप जैसे उपेक्षित क्षेत्रों में StCB की स्थापना से यह पहल सहकारी बैंकिंग को भारत की ग्रामीण वित्तीय प्रणाली में और गहराई से पिरोने का कार्य करेगी।


