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मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा की

बैठक में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कंप्यूटरीकरण, सहकारी निबंधक (RCS) कार्यालयों के डिजिटल एकीकरण और सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण परियोजना जैसी योजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई

Published: 16:33pm, 03 Nov 2025

सहकारिता मंत्रालय ने शनिवार को सहकारी क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय ऑनलाइन बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव पंकज कुमार बंसल ने की।

बैठक में मंत्रालय के संयुक्त सचिव सिद्धार्थ जैन, रमन कुमार, निदेशक कुमार राम कृष्ण समेत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य समन्वय को मजबूत करना, कार्यान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करना और सहकारी सुधारों के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था।

अतिरिक्त सचिव बंसल ने कहा कि सहकारी आंदोलन “सहकार से समृद्धि” के विजन के तहत समावेशी विकास और ग्रामीण समृद्धि का आधार है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, पारदर्शिता बढ़ाने, सहकारी संस्थाओं के डिजिटलीकरण को गति देने और प्रगति की निगरानी के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया।

बैठक में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कंप्यूटरीकरण, सहकारी निबंधक (RCS) कार्यालयों के डिजिटल एकीकरण और सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण परियोजना जैसी योजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई।

सभी राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर नए बहुउद्देशीय PACS, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के गठन और मॉडल उपविधियों के कार्यान्वयन की प्रगति साझा की।

बैठक में राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस (NCD) को पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाला एक परिवर्तनकारी उपकरण बताया गया। वर्तमान में यह डाटाबेस 30 क्षेत्रों में कार्यरत सहकारी समितियों को कवर करता है, जिनमें देशभर के 32 करोड़ से अधिक सदस्य शामिल हैं। मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से ऑडिट स्थिति, अवसंरचना और परियोजना क्रियान्वयन की जानकारी को रीयल-टाइम में अपडेट करने का आग्रह किया।

बंसल ने कहा कि आज सहकारी समितियां केवल कृषि और ऋण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, सेवाओं, वैल्यू चेन विकास और डिजिटल वित्त जैसे क्षेत्रों में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने डेयरी और कृषि विपणन सहकारी समितियों के नवाचारों के उदाहरण देते हुए कहा कि इनसे ग्रामीण आय और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

मंत्रालय के सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी बैठक के प्रमुख अंश साझा किए गए, जिनमें सामूहिक प्रयास और सुशासन पर सरकार के फोकस को रेखांकित किया गया।

बैठक में यह भी कहा गया कि सहकारी मॉडल सामुदायिक भागीदारी पर आधारित है और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को साकार करने में वित्तीय समावेशन, उद्यमिता और समान विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सभी राज्यों को सलाह दी गई कि वे अपने राज्य और जिला सहकारी विकास समितियों की नियमित बैठकें करें, श्रेष्ठ प्रथाओं को साझा करें और एनसीडीसी, नाबार्ड तथा एनसीयूआई जैसी राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर क्षमता निर्माण और परियोजना सहयोग सुनिश्चित करें।

बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सहकारिता को नवाचार, प्रौद्योगिकी और जनभागीदारी के माध्यम से ग्रामीण परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया जाएगा।

Diksha

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