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6 महीने में ही हुई खराब हुई मर्सिडीज, Consumer Court ने लगाया 1.78 करोड़ रुपए का जुरमाना

दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) ने मर्सिडीज-बेंज इंडिया को एक उपभोक्ता को 1.78 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया है। मामला EQS580 लग्जरी कार से जुड़ा है, जिसमें खरीद के छह माह बाद गंभीर मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पाए गए। आयोग ने उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च का मुआवजा भी प्रदान किया।

Published: 13:59pm, 22 Sep 2025

उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के उद्देश्य से स्थापित उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) ने मर्सिडीज-बेंज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह उपभोक्ता गुरविंदर खुराना को 1.78 करोड़ रुपये का मुआवजा प्रदान करे।

यह मामला नवंबर 2022 में खरीदी गई मर्सिडीज-बेंज EQS580 लग्जरी कार से जुड़ा है। समरन मीडिया कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर गुरविंदर खुराना ने इस वाहन को 1.55 करोड़ रुपये की कीमत पर खरीदा था। लेकिन खरीद के केवल छह माह बाद ही कार में गंभीर तकनीकी खामियां सामने आने लगीं।

मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित

आयोग के आदेशानुसार, इतनी उच्च कीमत वाली नई कार की बैटरी पैक का छह माह में बदलना यह दर्शाता है कि वाहन में गंभीर मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट मौजूद था। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह साधारण खराबी नहीं बल्कि संरचनात्मक खामी थी, जिसके कारण वाहन को बार-बार वर्कशॉप ले जाना पड़ा।

गुरविंदर खुराना ने आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि कार ने केवल 9,000 किलोमीटर चलने के बाद ही रुक-रुक कर समस्या उत्पन्न करनी शुरू कर दी। इसमें रियर टायर में उभार आना, रडार सेंसर का फेल होना, एसी ब्लोअर से असामान्य आवाज आना, और अचानक कार का बंद हो जाना जैसी कई खराबियां शामिल थीं।

कंपनी की दलीलें खारिज

मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने अपने बचाव में तर्क दिया कि खरीदार ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019’ की परिभाषा में उपभोक्ता नहीं आते, क्योंकि कार का उपयोग व्यावसायिक प्रयोजनों हेतु किया गया था। साथ ही कंपनी ने यह भी कहा कि खरीदार ने किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ से मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

हालांकि, आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता धींगरा सहगल और सदस्य पिंकी ने इन दलीलों को अस्वीकार कर दिया। आदेश में कहा गया कि EQS580 मॉडल को कंपनी ने भारत में बंद कर दिया है, इसलिए वाहन का प्रतिस्थापन संभव नहीं है। ऐसे में उपभोक्ता को उसकी पूरी कीमत लौटाई जानी चाहिए।

मुआवजा और अतिरिक्त राशि

कुल 1.78 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया, जिसमें शामिल हैं:

  • वाहन की मूल कीमत: 1.55 करोड़ रुपये

  • इंश्योरेंस और रोड टैक्स: 3.10 लाख रुपये

  • टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS): 1.55 लाख रुपये

  • बैंक लोन पर ब्याज (60 माह): 16 लाख रुपये

  • मानसिक पीड़ा हेतु: 5 लाख रुपये

  • मुकदमे के खर्च हेतु: 50 हजार रुपये

उपभोक्ताओं के लिए सबक

यह फैसला लग्जरी वाहनों के उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। आयोग ने स्पष्ट किया कि महंगी गाड़ियां खरीदने वाले उपभोक्ता भी कानूनी संरक्षण के दायरे में आते हैं। यदि किसी वाहन में समय से पूर्व खामियां सामने आती हैं तो उपभोक्ता को उपभोक्ता अदालत से राहत मिल सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा एवं वाहन उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हुआ है। आयोग के मुताबिक, ऐसी महंगी गाड़ियों में Defect आने पर उपभोक्ता पूरी तरह न्याय पाने के हकदार हैं, बशर्ते वे हर सर्विस विजिट और दिक्कत का उचित रिकॉर्ड रखें। वाहन की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता और कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय नजीर बनेगा।

YuvaSahakar Desk

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