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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम, पशुपालन को मिला कृषि के समान दर्जा

अब तक पशुपालन इकाइयों को बिजली की दरों में भेदभाव, सौर सब्सिडी की अनुपलब्धता और अधिक ग्राम पंचायत टैक्स जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। सरकार द्वारा घोषित नई नीति से पशुपालन क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और समूह आधारित फार्मिंग, वैल्यू एडेड प्रोसेसिंग तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में भी गति मिलेगी।

Published: 12:47pm, 02 Aug 2025

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया है। गुरुवार को जारी सरकारी आदेश (GR) के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र को कृषि के समान दर्जा प्रदान किया गया है। इस निर्णय के तहत पात्र पशुपालन इकाइयों को अब फसल उत्पादकों की तरह बिजली दरों में रियायत, सोलर उपकरणों पर सब्सिडी, ग्राम पंचायत टैक्स में एकरूपता, और लोन पर ब्याज सब्सिडी जैसे लाभ प्राप्त होंगे। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

पशुपालकों को मिलेंगी ये सुविधाएं

नए सरकारी आदेश के अनुसार, पशुपालन इकाइयों को अब ‘एग्री-अदर’ श्रेणी के बजाय सीधे कृषि दरों पर बिजली बिल प्राप्त होगा। इसके साथ ही, सोलर पंप और अन्य सौर उपकरणों पर दी जाने वाली सब्सिडी भी अब कृषि क्षेत्र के समान होगी। ग्राम पंचायत टैक्स को भी खेती के टैक्स के बराबर कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, कार्यशील पूंजी और अन्य लोन पर पशुपालकों को 4% तक ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जैसी कि पंजाबराव देशमुख ब्याज सब्सिडी योजना के तहत दी जाती है। यह निर्णय पशुपालकों के लिए आर्थिक राहत और प्रोत्साहन का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

पशुपालन क्षेत्र का महत्व

महाराष्ट्र आर्थिक सलाहकार परिषद की सिफारिशों के आधार पर लिया गया यह निर्णय राज्य की अर्थव्यवस्था को 2028 तक 8.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने के लक्ष्य का हिस्सा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र की कुल आय में कृषि क्षेत्र का योगदान 12% है, जिसमें पशुपालन से 24% राजस्व प्राप्त होता है। राज्य में 60 लाख से अधिक परिवार पशुपालन से जुड़े हैं। 20वीं पशुगणना के अनुसार, महाराष्ट्र में लगभग 1.9 करोड़ पशु हैं, जिनमें 1.4 करोड़ गाय-बैल और 56 लाख भैंसें शामिल हैं। यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है।

लाभ के लिए पात्र इकाइयां

सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 25,000 ब्रॉयलर मुर्गियों या 50,000 लेयर मुर्गियों तक की क्षमता वाली पोल्ट्री इकाइयां, 45,000 मुर्गियों तक की हैचरी इकाइयां, 100 दुधारू पशुओं तक के मवेशी शेड, 500 पशुओं तक के बकरी/भेड़ शेड, और 200 सूअरों तक की सुअर पालन इकाइयां इस योजना के तहत लाभ के लिए पात्र होंगी। हालांकि, प्रजनक मुर्गीपालन इकाइयां और पशु-उत्पाद प्रसंस्करण उद्योग इन लाभों के दायरे में नहीं आएंगे।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक पशुपालन क्षेत्र को बिजली दरों में भेदभाव, सोलर सब्सिडी की कमी, और उच्च ग्राम पंचायत टैक्स जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इस नए दर्जे से इन समस्याओं का समाधान होगा, जिससे पशुपालन में निवेश और भागीदारी बढ़ेगी। यह कदम ग्रुप-आधारित फार्मिंग और वैल्यू-एडेड प्रोसेसिंग जैसे आधुनिक तरीकों को बढ़ावा देगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

YuvaSahakar Desk

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