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छोटी मछलियां नहीं बेच सकेंगे महाराष्ट्र के मत्स्य पालक, राज्य सरकार ने तय किया आकार

महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि इस प्रकार की पहलों से समुद्री जैव विविधता की रक्षा हो सकेगी तथा मत्स्य उत्पादन में स्थिरता आएगी। राज्य सरकार आगे भी सीएमएफआरआई के साथ सहयोग बढ़ाने तथा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।

Published: 14:56pm, 15 Oct 2025

महाराष्ट्र सरकार ने मछली संरक्षण और मत्स्य व्यवसाय को टिकाऊ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने अब राज्य में बिकने वाली सभी मछलियों के लिए न्यूनतम कानूनी आकार (Minimum Legal Size – MLS) निर्धारित कर दिया है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य युवा और अधपकी मछलियों की पकड़ को रोकना और उनके प्रजनन को बढ़ावा देना है।

इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (Central Marine Fisheries Research Institute – CMFRI) के साथ साझेदारी की है। यह सहयोग मछली संसाधनों के संरक्षण और दीर्घकालिक मत्स्य विकास के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

क्यों जरूरी था यह कदम

पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में मछली पकड़ने के दौरान युवा मछलियों की अत्यधिक पकड़ ने उनके प्रजनन चक्र को प्रभावित किया था। परिणामस्वरूप, राज्य के वार्षिक मछली उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मछली को उसके पूर्ण आकार तक बढ़ने से पहले पकड़ा जाता है, तो यह भविष्य की मछली उपलब्धता और जैव विविधता दोनों को नुकसान पहुंचाता है।

न्यूनतम आकार के दिशा-निर्देश

राज्य सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब यदि कोई मछली तय न्यूनतम आकार (MLS) से छोटी पकड़ी जाती है, तो संबंधित मछली विभाग कार्रवाई करेगा।

  • सिल्वर पोम्फ्रेट और बंगड़ा (Indian Mackerel) — कम से कम 14 सेमी

  • झींगा — कम से कम 9 सेमी

  • बॉम्बे डक — कम से कम 18 सेमी

  • सुरमई — कम से कम 37 सेमी

महाराष्ट्र, इस नियम को लागू करने वाला देश का केरल के बाद दूसरा राज्य बन गया है।

मत्स्य उत्पादन और व्यापार में बढ़त

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मॉनसून के दौरान कड़े प्रतिबंधों के चलते युवा मछलियों की पकड़ में उल्लेखनीय कमी आई। परिणामस्वरूप, पोस्ट-मॉनसून सीजन में मछलियों की संख्या और आकार दोनों में वृद्धि दर्ज की गई।
जहां प्री-मॉनसून में पोम्फ्रेट मछली की उपलब्धता केवल 995 टन थी, वहीं नियंत्रित मछली पकड़ के बाद यह संख्या चार गुना से अधिक हो गई। इसी अवधि में मछली व्यापार भी 11 करोड़ रुपये से बढ़कर 350 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

जागरूकता अभियान और पालन आवश्यक

राज्य के मत्स्य पालन और बंदरगाह मंत्री श्री नितेश राणे ने हाल ही में MLS नियमों और युवा मछलियों की सुरक्षा पर समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी जिलों में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया ताकि मछुआरों और व्यापारियों को इस नीति के दीर्घकालिक लाभ समझाए जा सकें।

सरकार ने विभिन्न मछली प्रजातियों के न्यूनतम आकार दर्शाने वाले पोस्टर भी जारी किए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मछुआरे, व्यापारी और तटीय समुदाय MLS नियमों का पालन करें, जिससे आने वाले वर्षों में मत्स्य व्यवसाय और समुद्री पारिस्थितिकी दोनों को मजबूती मिले।

YuvaSahakar Desk

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