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आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना से खुशहाल होंगे किसान, डेयरी क्षेत्र की इस योजना के बारे में जानिए

मध्यप्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और किसानों की आय में वृद्धि हेतु "आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना" की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत डेयरी स्थापना के लिए किसानों को बैंक ऋण, ब्याज अनुदान और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

Published: 09:00am, 01 Jun 2025

मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके लिए “आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना” शुरू की गई है, जो डेयरी व्यवसाय को प्रोत्साहित करने और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखती है। इस योजना के माध्यम से किसानों और युवाओं को गाय-भैंस की डेयरी स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता और अनुदान प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे दूध उत्पादन के साथ-साथ डेयरी व्यवसाय को लाभकारी रूप से संचालित कर सकें।

योजना के तहत डेयरी स्थापना के लिए कुल लागत का 75 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऋण के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि हितग्राही को अंशदान के रूप में देनी होती है। इसके अतिरिक्त, 7 वर्षों तक ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज की प्रतिपूर्ति अनुदान के रूप में दी जाती है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रतिवर्ष 25,000 रुपये है। योजना में भाग लेने के लिए पशुपालक के पास कम से कम 5 पशुओं के लिए 1 एकड़ कृषि भूमि होना अनिवार्य है। पशुओं की संख्या बढ़ने पर कृषि भूमि का अनुपात उसी के अनुसार निर्धारित किया जाता है।

पशुपालन विभाग ने डेयरी स्थापना की लागत को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया है। 5 भैंसों की डेयरी के लिए 4 लाख 25 हजार रुपये, 5 संकर नस्ल की गायों के लिए 3 लाख 82 हजार रुपये, और 5 देसी गायों के लिए 2 लाख 43 हजार 750 रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इसी तरह, 10 भैंसों की डेयरी के लिए 8 लाख 40 हजार रुपये, 10 संकर गायों के लिए 7 लाख 51 हजार रुपये, और 10 देसी गायों के लिए 4 लाख 75 हजार रुपये की लागत निर्धारित की गई है।

योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक किसान अपने जिले के पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु औषधालय के प्रभारी, या पशुपालन विभाग के कार्यालय में संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद, पशुपालन विभाग प्रकरण को बैंकों में भेजता है, और स्वीकृति के बाद हितग्राही को निर्धारित राशि प्रदान की जाती है। MP सरकार का कहना है कि यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और डेयरी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

YuvaSahakar Desk

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