ग्रामीण सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से KRIBHCO “पैक्स को मल्टी-पर्पज हब के रूप में: ग्रामीण आर्थिक मजबूती के लिए सेवाओं का विविधीकरण” विषय पर एक मेगा कोऑपरेटिव कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर रहा है। यह सम्मेलन आज राजकोट में आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य “सहकार से समृद्धि” के राष्ट्रीय विजन को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) की भूमिका का विस्तार कर ग्रामीण समृद्धि को नई गति देने के नवाचारपूर्ण उपायों पर चर्चा होगी।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रवीन्द्र कुमार अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

इस सम्मेलन में कृभको के वाइस चेयरपर्सन और आईसीएपी के प्रेसीडेंट डॉ चंद्रपाल यादव ने भी हिस्सा लिया। डॉ चंद्रपाल ने सभी अतिथि गण का सम्मेलम में स्वागत व अभिनंदन किया। उन्होंने कहा UN ने पूर्ण 2025 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ कोऑपरेटिव्स के रुप में मनान का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा हमारें सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जो “सहकार से समृद्दि” का नारा दिया है आज पूरी दुनिया उस नारें को अडॉप्ट कर रही है। डॉ चन्द्रपाल ने कहा हमारा सहकारी आन्दोलन बहुत पुराना है। वर्ष 1904 से हमारा सहकारी आन्दोलन चल रहा है। और इसके साथ ही सबसे पहली कोऑपरेटिव सोसाइटी भी गुजरात में 1904 में रजिस्टर हुई थी।
उन्होंने बताया की सहकारिता के माध्यम से देश में खुशहाली आ रही है। हिन्दुस्तान में कुल साढे 8 लाख कोऑपरेटिव सोसाइटी है। 30 करोड़ लोग सहकारी आन्दोलन से जुड़े हुए है।
उन्होंने बताया कि प्राइमरी कोऑपरेटिव सोसाइटी हमारें कोऑपरेटिव मूवमेंट की आधारशिला है। उन्होंने बताया लोगो में जागरूकता फैलानें के लिए सहकार ही ऐसा माध्यम है जिससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। आप आत्मनिर्भर हो सकते है और आपको समाज में सम्मान मिल सकता है।
उन्होंने बताया जो कोऑपरेटिव सोसाइटी है उनको भारत सरकार ने बहुउद्देशीय बना दिया है।
इसके साथ ही ICA–एशिया और पैसिफिक के प्रेसिडेंट के रुप में निर्वाचित होने पर डॉ. चंद्र पाल सिंह यादव ने अपने प्रति जताए गए समर्थन और विश्वास के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है।
डॉ. यादव ने दोबारा सर्वसम्मति से चुने जाने को अत्यंत सम्मानजनक क्षण बताया। उनके अनुसार यह सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में एकता, सद्भाव और साझा उद्देश्य का मजबूत प्रतीक है। उन्होंने सहकारी आंदोलन को सुदृढ़ बनाने हेतु अपने कार्य में विश्वास जताने के लिए सभी सदस्यों का धन्यवाद किया।
अंत में डॉ. यादव ने सहयोग और साझेदारी की भावना के साथ सभी के साथ मिलकर कार्य करने की उम्मीद जताई।


