बिहार के समस्तीपुर स्थित पूसा में देश का पहला और विश्व का पांचवां अंतरराष्ट्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। यह केंद्र गन्ना किसानों को उन्नत तकनीक, उच्च गुणवत्ता वाले बीज और नवीनतम शोध प्रदान करेगा, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि होगी।
यह केंद्र न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के गन्ना किसानों के लिए एक क्रांतिकारी पहल साबित होगा। गन्ना विभाग द्वारा इस परियोजना को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है और विभागीय सूत्रों के अनुसार, इसे ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का दर्जा प्रदान किया जा सकता है।
इस केंद्र के माध्यम से गन्ना किसानों को उन्नत तकनीकों, उच्च गुणवत्ता वाले बीजों और नवीनतम शोध से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे न केवल उनकी उत्पादकता में वृद्धि होगी, बल्कि उनकी आय में भी इजाफा होगा। यह केंद्र विश्वस्तरीय अनुसंधान का केंद्र बनेगा, जहां देश-विदेश के किसान प्रशिक्षण लेने आ सकेंगे। गन्ना विभाग के सचिव ने बताया कि इस परियोजना पर विचार-विमर्श चल रहा है और प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद औपचारिक घोषणा की जाएगी।
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर के साथ इस उपलब्धि की जानकारी साझा की है। पोस्ट में कहा गया, “गन्ना अनुसंधान में बिहार बनेगा अव्वल… देश का पहला और विश्व का पांचवां विश्वस्तरीय गन्ना अनुसंधान केंद्र अब पूसा, समस्तीपुर में खुलेगा।” यह घोषणा बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजनीतिक दल अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने में जुटे हैं।
वर्तमान में विश्व स्तर पर केवल चार देशों दक्षिण अफ्रीका (एसएएसआरआई), चीन (गुआंगजी गन्ना उद्योग अनुसंधान संस्थान), तंजानिया (किबाहा गन्ना अनुसंधान संस्थान) और बांग्लादेश (ईशुर्दी गन्ना अनुसंधान संस्थान)—में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र हैं। पूसा में प्रस्तावित केंद्र विश्व का पांचवां और भारत का पहला ऐसा केंद्र होगा। यह बिहार के गन्ना उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और वैश्विक स्तर पर इसकी पहचान को मजबूत करेगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना की पहली बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है। केंद्र के स्थापित होने से गन्ना किसानों को आधुनिक तकनीकों और शोध का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी खेती अधिक लाभकारी बनेगी। यह केंद्र गन्ना उत्पादन में नवाचार को बढ़ावा देगा और बिहार को कृषि क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएगा। इस परियोजना को लेकर किसानों और स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है, क्योंकि यह न केवल आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा।


