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जुलाई में भारत की बेरोजगारी दर घटकर 5.2% हुई, बीते 3 माह में सबसे कम

ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 4.4 फीसदी रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 7.2% है। पुरुषों की बेरोजगारी दर 4.6% की तुलना में महिलाओं में यह दर (8.7%) ज्यादा है, खासकर शहरी क्षेत्रों में। यह डेटा बताता है कि शहरों में महिलाओं को रोजगार ढूंढने में पुरुषों की तुलना में अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

Published: 12:20pm, 19 Aug 2025

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार जुलाई 2025 में देश की बेरोज़गारी दर घटकर 5.2% रह गई है, जो कि पिछले 3 माह में सबसे कम है। जो जून 2025 में 5.6 प्रतिशत थी।

पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की बेरोजगारी दर ज्यादा

ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 4.4 फीसदी रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 7.2% है। पुरुषों की बेरोजगारी दर 4.6% की तुलना में महिलाओं में यह दर (8.7%) ज्यादा है, खासकर शहरी क्षेत्रों में। यह डेटा बताता है कि शहरों में महिलाओं को रोजगार ढूंढने में पुरुषों की तुलना में अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) जुलाई में बढ़कर 54.9% पहुँच गई, जबकि जून में यह 54.2% थी। ग्रामीण इलाकों में यह आँकड़ा 56.9% और शहरी क्षेत्रों में 50.7% रहा।

ग्रामीण पुरुषों की श्रम भागीदारी दर 78.1% रही, जबकि शहरी पुरुषों के लिए यह 75.1% दर्ज की गई। वहीं महिलाओं के संदर्भ में सबसे अहम सुधार देखने को मिला। ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी दर जुलाई में 36.9% हो गई, जो जून में 35.2% थी।

वर्कर पॉप्युलेशन रेशियो (WPR) भी सुधरा

इसी तरह, वर्कर पॉप्युलेशन रेशियो (WPR) भी सुधार के संकेत दे रहा है। ग्रामीण इलाकों में जुलाई 2025 में WPR बढ़कर 54.4% पहुँच गया, जो जून में 53.3% था। शहरी इलाकों में यह मामूली बढ़त के साथ 47.0% रहा।

महिलाओं के संदर्भ में तस्वीर अब भी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सुधार के संकेत साफ हैं। ग्रामीण महिलाओं का WPR 35.5% दर्ज किया गया, जबकि शहरी महिलाओं के लिए यह केवल 23.5% रहा। देश स्तर पर कुल महिला WPR 31.6% रहा।

Diksha

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