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भारत की ऊर्जा मांग 2050 तक अन्य देशों से अधिक बढ़ेगीः बीपी रिपोर्ट

बीपी के मुख्य अर्थशास्त्री स्पेंसर डेल ने बताया कि भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक एवं उपभोक्ता देश और चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है

Published: 11:27am, 07 Oct 2025

ब्रिटिश तेल कंपनी बीपी (BP) की नवीनतम ‘एनर्जी आउटलुक 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत आने वाले दशकों में विश्व का सबसे तेजी से बढ़ता ऊर्जा बाजार बनकर उभरेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की ऊर्जा और तेल की मांग वर्ष 2050 तक अन्य सभी देशों की तुलना में सबसे अधिक बढ़ेगी, जिससे भारत का वैश्विक ऊर्जा बाजार में हिस्सा 12 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा।

बीपी के मुख्य अर्थशास्त्री स्पेंसर डेल ने बताया कि भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक एवं उपभोक्ता देश और चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक है। रिपोर्ट के अनुसार भारत की तेल मांग मौजूदा 54 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 2050 तक 91 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच जाएगी। वहीं प्राकृतिक गैस की खपत 63 अरब घन मीटर से बढ़कर 153 अरब घन मीटर हो जाएगी।

यदि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2023 से 2050 तक औसतन 5 प्रतिशत प्रति वर्ष रहती है, तो देश की प्राथमिक ऊर्जा खपत में भी तेजी देखने को मिलेगी। वर्ष 2023 में भारत का वैश्विक ऊर्जा मांग में 7 प्रतिशत हिस्सा था, जो 2050 तक 12 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है।

रिपोर्ट में दो परिदृश्य पेश किए गए हैं, पहला परिदृश्य मौजूदा वृद्धि-पथ पर आधारित परिदृश्य हैं, जिसमें 2050 तक भारत की ऊर्जा जरूरतों में कोयले की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से ऊपर रहेगी जबकि दूसरा परिदृश्य वैश्विक तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस कमी लाने पर आधारित है, जिससे कोयले की हिस्सेदारी घटकर 16 प्रतिशत रह जाएगी। दोनों ही परिदृश्यों में प्राकृतिक गैस की खपत हर साल 1 से 3 प्रतिशत की दर से बढ़ती रहेगी।

डेल ने कहा कि भारत विश्व का सबसे तेजी से बढ़ता ऊर्जा बाजार है। आने वाले वर्षों में सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय संसाधनों का योगदान बढ़ेगा, लेकिन जीवाश्म ईंधन की मांग भी बनी रहेगी। उन्होंने भारत के 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता के लक्ष्य की सराहना करते हुए कहा कि यह लक्ष्य निर्धारित समय से एक-दो साल बाद तक हासिल हो जाएगा।

डेल ने आगे कहा कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा के लिए आयात पर निर्भरता घटाकर घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। तेजी से कार्बन कटौती के परिदृश्य में भी भारत की तेल और गैस मांग 2030 के शुरुआती वर्षों तक बढ़ती रहेगी, जिसके बाद धीरे-धीरे इसमें गिरावट आ सकती है।

बीपी के मुख्य अर्थशास्त्री ने अपने निष्कर्ष में कहा, ‘भारत के ऊर्जा बाजार की वृद्धि तेज है और यह वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में अहम भूमिका निभाएगा। देश को नवीकरणीय ऊर्जा एवं पारंपरिक ईंधन दोनों में संतुलन बनाए रखना होगा।’

Diksha

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