भारत सरकार ने अमेरिका के साथ चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के दौरान स्पष्ट कर दिया है कि देश की डेयरी और कृषि क्षेत्रों को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं खोला जाएगा। इन क्षेत्रों को लेकर भारत का रुख सख्त और स्पष्ट है – सरकार किसानों के हितों और घरेलू उत्पादकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी।
यह स्थिति 4 से 10 जून के बीच नई दिल्ली में भारत-अमेरिका व्यापार अधिकारियों के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान सामने आई। अमेरिकी पक्ष की ओर से डेयरी, कृषि, मेडिकल उपकरण और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में भारत से और अधिक बाजार पहुंच की मांग की गई, लेकिन भारत ने विशेष रूप से डेयरी और कृषि को “संवेदनशील क्षेत्र” बताते हुए इन मांगों को अस्वीकार कर दिया।
भारत सरकार का मानना है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता तभी संभव है, जब वह पारस्परिक हितों और संतुलन पर आधारित हो। इस उद्देश्य से भारत किसी भी प्रकार के एकतरफा दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह घरेलू डेयरी और कृषि क्षेत्र के लाखों छोटे उत्पादकों की आजीविका के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
गौरतलब है कि अमेरिका की पिछली सरकार द्वारा लागू की गई रेसिप्रोकल टैरिफ नीति पर आगामी 8 जुलाई तक अस्थायी रोक लगी हुई है। दोनों देश इस समयसीमा से पहले एक संतुलित व्यापार समझौते पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि द्विपक्षीय व्यापार प्रभावित न हो।
इस वार्ता के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य स्वदेश लौट गए, जबकि कुछ सदस्य अभी भी भारतीय अधिकारियों के साथ चर्चा में जुटे हैं।
वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, दोनों देश जुलाई 2025 तक एक अंतरिम समझौते पर पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं। हालांकि, पूर्ण समझौते के लिए अभी और समय लग सकता है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह राष्ट्रीय हितों की रक्षा को प्राथमिकता देगा और किसी भी दबाव में आकर समझौता नहीं करेगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने के साझा लक्ष्य “मिशन 500” का हिस्सा है।


